Tuesday, January 20

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बढ़ी उम्मीद: तीन महीने में समझौता संभव, अमेरिकी कंपनियों ने निवेश पर जताया भरोसा

नई दिल्ली।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं और अमेरिकी व्यापार नीतियों को लेकर बनी आशंकाओं के बीच भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। अमेरिका-भारत स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के अध्यक्ष और सीईओ मुकेश अघी ने उम्मीद जताई है कि अगले तीन महीनों के भीतर भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक समझौता हो सकता है। यह बयान उन्होंने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF), दावोस के दौरान दिया।

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मुकेश अघी ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। कई दौर की चर्चाओं के बाद अब सहमति की जमीन तैयार हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि जैसे जटिल और तकनीकी रूप से संवेदनशील मुद्दों पर भी दोनों देश मिलकर समाधान तलाश रहे हैं, जो इस समझौते को पहले की तुलना में अधिक व्यापक और मजबूत बनाएगा।

अमेरिकी कंपनियों का भारत पर भरोसा कायम
टैरिफ विवादों और राजनीतिक बयानबाजी के बावजूद अमेरिकी कंपनियों का भारत पर भरोसा बरकरार है। बिजनेस टुडे टीवी को दिए इंटरव्यू में अघी ने बताया कि 100 से अधिक अमेरिकी और वैश्विक सीईओ से बातचीत में एक भी कंपनी ने भारत में निवेश घटाने या अपनी सप्लाई चेन कहीं और ले जाने की बात नहीं कही
उन्होंने कहा कि भारत को अब केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के केंद्र के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत बना ग्लोबल इनोवेशन हब
अघी के अनुसार, भारत में इस समय 2,000 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स काम कर रहे हैं, जिनमें से करीब 60 प्रतिशत अमेरिकी कंपनियों के हैं। इन केंद्रों में न केवल रोजगार सृजन हो रहा है, बल्कि बड़ी मात्रा में बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) का भी निर्माण किया जा रहा है।
AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में हालिया बड़े निवेश भारत की ग्रोथ स्टोरी में अमेरिकी कंपनियों के गहरे विश्वास को दर्शाते हैं।

सुधारों पर जोर, राज्यों से अपेक्षा
हालांकि अघी ने यह भी कहा कि भारत में सुधारों की गति सराहनीय है, लेकिन लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाने और व्यापार करने में आसानी के लिए राज्यों के स्तर पर और प्रयासों की जरूरत है। इससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।

भारतीय टैलेंट अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रीढ़
लोगों के बीच संबंधों पर बात करते हुए अघी ने कहा कि भारतीय प्रतिभा अमेरिकी अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने एच-1बी जैसे वर्क वीजा से जुड़ी चुनौतियों को वैश्विक प्रणालीगत समस्या बताया, लेकिन साथ ही यह भी रेखांकित किया कि भारतीय पेशेवरों की अमेरिका में हमेशा जरूरत रही है और वे वहां की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देते हैं।

राजनीति से ऊपर रणनीतिक साझेदारी
मुकेश अघी ने जोर देकर कहा कि भारत-अमेरिका संबंध केवल राजनीतिक नेतृत्व पर निर्भर नहीं हैं। यह साझेदारी व्यापार, रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी, नवाचार और मजबूत प्रवासी रिश्तों से संचालित होती है।
उन्होंने दोनों देशों से अपील की कि राजनीतिक शोर से ऊपर उठकर उन ठोस आपसी हितों पर ध्यान दिया जाए, जो लंबी अवधि की रणनीतिक साझेदारी की नींव हैं।

कुल मिलाकर, दावोस से आई यह तस्वीर भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत देती है और आने वाले महीनों में एक अहम व्यापार समझौते की उम्मीद को और मजबूत करती है।

 

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