
अमेरिका में उच्च शिक्षा के लिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को हमेशा ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता रहा है। क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग हो या टाइम्स हायर एजुकेशन रैंकिंग, हर जगह हार्वर्ड टॉप-5 में शामिल रहती है। लेकिन हाल के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय छात्र अब हार्वर्ड में पढ़ाई के लिए उतने उत्साहित नहीं हैं।
भारतीय छात्रों में गिरावट:
फॉल 2025 सेशन के लिए हार्वर्ड के फैक्ट बुक के अनुसार, भारत से आए छात्रों की संख्या 788 से घटकर 545 हो गई है। यानी एक अकेडमिक ईयर में भारतीय छात्रों की संख्या में 31% की गिरावट दर्ज की गई। 2023 और 2024 के फॉल सेशन के दौरान संख्या स्थिर थी, लेकिन हालिया एडमिशन में यह तेजी से घट गई।
क्यों घट रही संख्या?
यूनिवर्सिटी के ‘ऑफिस ऑफ इंस्टीट्यूशनल रिसर्च एंड एनालिटिक्स’ के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी छात्रों का कुल एडमिशन बढ़ा है, लेकिन भारतीय छात्रों की संख्या घट रही है। इसका मुख्य कारण अमेरिका में इमिग्रेशन नीतियों में बदलाव है।
पिछले साल अमेरिकी सरकार ने विदेशी छात्रों के वीजा और प्रवेश को लेकर सख्ती बढ़ाई। हार्वर्ड समेत कई संस्थानों को फंडिंग रोकने और विदेशी छात्रों के एडमिशन पर दबाव बनाने के मामले सामने आए।
इसके अलावा:
वीजा अप्रूवल की प्रक्रिया कड़ी और लंबी हो गई है।
प्रोसेसिंग टाइम बढ़ गया है।
भारतीय छात्रों को इमिग्रेशन से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इन सब कारणों से भारतीय छात्र ऐसे संस्थानों में एडमिशन लेने में झिझक रहे हैं।
फिर भी, अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में भारतीयों की संख्या सबसे बड़ी है। देश में करीब 3.31 लाख भारतीय विभिन्न कोर्सेज में डिग्री ले रहे हैं।
संक्षेप में:
भारतीय छात्र अब हार्वर्ड से दूर रहना इसलिए पसंद कर रहे हैं, क्योंकि इमिग्रेशन नियमों में सख्ती और वीजा प्रक्रिया की जटिलताएं उनके लिए बाधा बन रही हैं।