Wednesday, June 24

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दिल्ली | प्रदूषण के बीच राजधानी में दिखे 90 से ज्यादा ‘फॉग होल’, रिसर्च ने बढ़ाई चिंता

राजधानी दिल्ली में सर्दियों के मौसम के दौरान एक नया और चिंताजनक पर्यावरणीय ट्रेंड सामने आया है। घने कोहरे और गंभीर प्रदूषण के बीच दिल्ली में 90 से अधिकफॉग होल देखे गए हैं। यह खुलासा अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन की एक अहम रिसर्च में हुआ है, जिसने वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों को चौंका दिया है।

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रिसर्च के मुताबिक, फॉग होल की यह समस्या सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। पंजाब, हरियाणा, उत्तरपूर्वी राजस्थान, उत्तरी उत्तर प्रदेश और उत्तरपूर्वी बिहार में भी ऐसे मामले सामने आए हैं, लेकिन सबसे अधिक फॉग होल दिल्लीएनसीआर में दर्ज किए गए हैं

क्या हैं फॉग होल?
फॉग होल ऐसे क्षेत्र होते हैं, जहां चारों ओर घना कोहरा होने के बावजूद बीच में कोहरे का एक खाली या साफ हिस्सा दिखाई देता है। यह स्थिति मुख्य रूप से शहरीकरण, बढ़ते तापमान और प्रदूषण के कारण बन रही है।

नासा की सैटेलाइट से हुआ खुलासा
इस अध्ययन में नासा की सैटेलाइट इमेज का सहारा लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले करीब दो दशकों से दुनिया भर में फॉग होल देखे जा रहे हैं, लेकिन एशिया के घनी आबादी वाले क्षेत्रों—खासतौर पर दिल्ली—में इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है। स्टडी में बताया गया कि प्रदूषण के कारण फॉग बनने की प्राकृतिक प्रक्रिया धीमी पड़ रही है, जिससे फॉग होल बन रहे हैं।

यूरोपयूएस में घट रही फॉग, भारत में बढ़ रही समस्या
रिसर्च में यह भी सामने आया है कि यूरोप और अमेरिका में अर्बन हीट इफेक्ट की वजह से लॉन्ग टर्म फॉग की घटनाएं कम हो रही हैं, जबकि अब यही ट्रेंड भारत में भी दिखने लगा है

क्या कहते हैं मौसम विशेषज्ञ
स्काईमेट के चीफ मेट्रोलॉजिस्ट डॉ. महेश पलावत के अनुसार, दिल्ली में फॉग होल की समस्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि घनी आबादी, ज्यादा ट्रैफिक, कम हरियाली और बढ़ता तापमान इसके प्रमुख कारण हैं। ऐसे इलाकों में फॉग जल्दी खत्म हो जाती है, जिससे फॉग होल बनते हैं।

हरियाली वाले इलाकों में फॉग देर तक कायम
डॉ. पलावत के मुताबिक, रिज, अरावली, आया नगर जैसे क्षेत्रों में हरियाली अधिक होने की वजह से कोहरा देर तक बना रहता है। वहीं साउथ एक्स, आरके पुरम और पंजाबी बाग जैसे शहरी इलाकों में फॉग जल्दी छंट जाती है।

प्रदूषण पर भी पड़ता है असर
फॉग होल का सीधा असर प्रदूषण पर भी पड़ता है। जिन क्षेत्रों में फॉग होल बनते हैं, वहां स्मॉग लंबे समय तक ठहरती है, तापमान अधिक रहता है और हवा की गुणवत्ता में सुधार देर से होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस पूरे ट्रेंड पर और गहन रिसर्च की जरूरत है, ताकि भविष्य में इसके प्रभावों से निपटा जा सके।

पर्यावरणविदों का मानना है कि यह शोध शहरीकरण, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के खतरनाक संकेत देता है, जिस पर समय रहते गंभीर कदम उठाना जरूरी है।

 

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