Monday, January 19

दिल्ली | ई-कार खरीदने में हिचक, एमसीडी की लापरवाही से अधूरा चार्जिंग नेटवर्क

राजधानी दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की सरकारी मंशा जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आ रही है। नई दिल्ली में ई-गाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए जिन चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाया जाना था, उसमें एमसीडी की गंभीर लापरवाही सामने आई है। तय लक्ष्य के मुकाबले आधे से भी कम चार्जिंग स्टेशन बन पाए हैं, जिसके चलते लोग इलेक्ट्रिक कार खरीदने से हिचक रहे हैं।

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1000 का लक्ष्य, बने सिर्फ 422 स्टेशन
दिल्ली में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए हर एजेंसी को चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य दिया गया था। एमसीडी को करीब 1000 चार्जिंग स्टेशन बनाने थे, लेकिन अब तक वह महज 422 स्टेशन ही स्थापित कर पाई है। यानी लक्ष्य का 50 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो सका है।

एमसीडी के पास इस समय लगभग 420 पार्किंग साइट्स हैं, लेकिन इन सभी स्थानों पर भी चार्जिंग स्टेशन नहीं लगाए जा सके हैं। यही नहीं, एमसीडी मुख्यालय और इसके 12 जोनल ऑफिसों में से अधिकांश में भी ई-चार्जिंग स्टेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

मानकों पर भी खरी नहीं उतर रही दिल्ली
नियमानुसार, शहर में हर तीन किलोमीटर की दूरी पर एक चार्जिंग स्टेशन होना चाहिए, ताकि ई-वाहन चालकों को किसी तरह की परेशानी न हो। लेकिन मौजूदा स्थिति में दिल्ली इन मानकों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पा रही है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की यह कमी ही लोगों के मन में रेंज और चार्जिंग को लेकर असमंजस पैदा कर रही है।

सरकारी कंपनी पर टिकी जिम्मेदारी
एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए भारत सरकार की एक कंपनी के साथ समझौता किया गया है। यह कंपनी उन स्थानों की सूची उपलब्ध कराती है, जहां चार्जिंग स्टेशन बनाए जाने हैं। इसके बाद एमसीडी संबंधित स्थानों पर जमीन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराती है।

अधिकारी के अनुसार, कंपनी द्वारा अब तक चिन्हित सभी स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन बनाए जा चुके हैं। जैसे ही अगली सूची सौंपी जाएगी, वहां भी स्टेशन स्थापित करने के लिए आवश्यक जगह उपलब्ध करा दी जाएगी।

चार्जिंग स्टेशन नहीं, तो कार क्यों?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक चार्जिंग स्टेशनों का मजबूत और भरोसेमंद नेटवर्क नहीं बनेगा, तब तक आम लोग इलेक्ट्रिक कार खरीदने का जोखिम नहीं उठाएंगे। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम मानी जाने वाली ई-गाड़ियों की रफ्तार फिलहाल चार्जिंग ढांचे की सुस्ती के चलते थमी हुई नजर आ रही है।

 

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