Monday, January 19

ChatGPT को सही जवाब पाने के लिए नहीं करना पड़े ‘प्लीज’, नई स्टडी में खुला असली सच

 

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नई दिल्ली: अगर आपको लगता है कि चैटजीपीटी से ज्यादा प्लीज कहने पर आपको सही जवाब मिलेगा, तो ऐसा नहीं है। हाल ही में पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की नई स्टडी में सामने आया कि AI चैटबॉट विनम्र भाषा के बजाय कठोर या रूड टोन वाले सवालों पर ज्यादा सटीक जवाब देता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने चेतावनी भी दी है कि यह आदत इंसानों के व्यवहार पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

 

क्या है स्टडी में पाया गया:

शोधकर्ताओं ने ChatGPT के 40 मॉडल्स पर 50 मल्टीपल-चॉइस सवाल टेस्ट किए और लगभग 250 प्रॉम्प्ट्स इस्तेमाल किए। इनमें कुछ सवाल बहुत विनम्र यानी पॉलाइट थे और कुछ बहुत रूड यानी अपमानजनक टोन में थे। नतीजा यह आया कि रूड प्रॉम्प्ट्स पर ChatGPT की सटीकता 84.8% थी, जबकि पॉलाइट प्रॉम्प्ट्स पर केवल 4%।

 

विनम्र भाषा में सही जवाब कम:

स्टडी से पता चला कि ChatGPT ‘कृपया हल करें’ जैसी विनम्रता वाली भाषा के मुकाबले, हुक्म चलाने वाले शब्दों या मांगने वाले टोन पर बेहतर प्रतिक्रिया देता है। लेकिन शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि इस तरह की आदत लंबे समय में गलत व्यवहार और असभ्यता को बढ़ावा दे सकती है।

 

यूजर के अनुभव पर प्रभाव:

रिसर्चर्स के अनुसार, AI चैटबॉट के साथ अपमानजनक या दबाव डालने वाली भाषा का इस्तेमाल यूजर एक्सपीरियंस, पहुँच और इंक्लूसिविटी पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। हालांकि इससे तत्काल जवाब बेहतर मिल सकता है, लेकिन यह लोगों के आपसी संवाद और व्यवहार को भी प्रभावित कर सकता है।

 

AI चैटबॉट को क्या चीजें प्रभावित करती हैं:

यह शुरुआती स्टडी है और इसे अभी दूसरे वैज्ञानिकों ने रिव्यू नहीं किया है। स्टडी में बताया गया कि सवाल की बनावट और इस्तेमाल किया गया टोन दोनों AI के जवाबों को प्रभावित कर सकते हैं। पिछली स्टडीज में भी यह पाया गया कि AI मॉडल इंसानों द्वारा दी गई भाषा और तरीके से प्रभावित होते हैं।

 

सावधानी जरूरी:

AI से बातचीत करते समय सावधानी बरतना जरूरी है। भले ही रूड टोन का इस्तेमाल करने पर AI सटीक जवाब दे, लेकिन यह इंसानों के व्यवहार पर भी असर डाल सकता है। इसलिए AI का सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल करने की जरूरत है और इस क्षेत्र में अधिक रिसर्च की आवश्यकता है।

 

 

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