
शिंदे–उद्धव सेना के नगरसेवकों की होटल पॉलिटिक्स ने बढ़ाया सस्पेंस
मुंबई: महाराष्ट्र में हाल ही में हुए निकाय चुनावों के परिणाम राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) ने बीएमसी की सत्ता खो दी, जबकि एनसीपी और कांग्रेस को भी अपने गढ़ों में चुनौती का सामना करना पड़ा। बीजेपी ने 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का दावा किया, लेकिन मेयर कौन होगा, इसको लेकर सस्पेंस बरकरार है।
हॉर्स ट्रेडिंग का डर
मुंबई में हॉर्स ट्रेडिंग के डर से सभी राजनीतिक दल अपने नगरसेवकों को एकजुट रखने में जुटे हैं। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने 29 नगरसेवकों को बांद्रा के एक फाइव-स्टार होटल में रखा और उन्हें संबोधित किया। इसके विपरीत, उद्धव सेना के 15 नगरसेवक रविवार को मोबाइल फोन पर नॉट रीचेबल आए, जिससे राजनीतिक गलियारों में हॉर्स ट्रेडिंग की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया।
उद्धव सेना और शिंदे सेना की प्रतिक्रिया
उद्धव सेना के नेता संजय राउत ने कहा, “महापौर शिंदे सेना या ठाकरे बंधुओं का हो, बस बीजेपी का नहीं।” वहीं शिंदे सेना की नेत्री शीतल म्हात्रे ने कहा कि जनता ने महायुति को जनमत दिया है और हमारा ही महापौर बनेगा। उनके 29 में से 20 नगरसेवक पहली बार चुनाव जीतकर आए हैं, और होटल में ठहराने का उद्देश्य उन्हें कामकाज की ट्रेनिंग देना है, न कि राजनीतिक फूट डालना।
AIMIM और कांग्रेस की रणनीति
रविवार को AIMIM ने भी अपने 8 नवनिर्वाचित नगरसेवकों के साथ बैठक की और उन्हें दबाव या लालच से दूर रहकर पार्टी लाइन पर बने रहने की सलाह दी। इसी तरह कांग्रेस के 24 नगरसेवक भी लगातार अपने नेताओं के संपर्क में हैं।
राजनीतिक तनाव और संभावनाएँ
सूत्रों के मुताबिक, उद्धव सेना के कुछ नगरसेवक एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं, जिससे मुंबई में राजनीतिक फूट की संभावनाएँ बढ़ गई हैं। संजय राउत ने कहा कि शिंदे के नगरसेवक असल में शिवसैनिक हैं और मराठी पहचान की मशाल अभी भी उनके मन में जल रही है। उनका मानना है कि बीजेपी को महापौर बनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।