
पटना/बांका: बिहार की सियासत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘होम्योपैथिक इलाज’ शैली एक बार फिर चर्चा में है। इस बार निशाने पर जदयू सांसद गिरधारी यादव हैं। राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि जदयू पार्टी के भीतर उनकी पकड़ धीरे-धीरे कमजोर की जा रही है और इसका असर हाल ही में हुए मंदौर महोत्सव सह बौसी मेला में दिखा।
मेला के उद्घाटन समारोह में सांसद गिरधारी यादव ने अध्यक्षता की, लेकिन जैसे ही उनका भाषण शुरू होना था, कई एनडीए और जदयू के विधायक मंच छोड़कर चले गए। बेलहर के विधायक मनोज यादव, घोरैया के विधायक मनीष कुमार, आर अमरपुर के जयंत राज और बीजेपी के राम नारायण मंडल व पूरन लाल टुडू भी कार्यक्रम से बाहर हो गए। इसके बाद गिरधारी यादव के समर्थकों को छोड़कर पांडाल लगभग खाली हो गया।
विधायकों के बहिष्कार का कारण:
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह व्यवहार सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ एक तरह का उपेक्षित बहिष्कार था। इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:
- गिरधारी यादव का एसआईआर विरोध, जिससे विपक्ष को फायदा मिला।
- उनके पुत्र चाणक्य प्रकाश द्वारा राजद की सदस्यता ग्रहण करना। चाणक्य प्रकाश ने राजद से बेलहर विधानसभा से चुनाव लड़कर जदयू के उम्मीदवार मनोज यादव को कड़ी टक्कर दी, हालांकि हार का सामना करना पड़ा।
इस स्थिति से जदयू आलाकमान ने सांसद गिरधारी यादव के प्रति सतर्कता दिखाते हुए पार्टी में उनकी पकड़ धीरे-धीरे कमजोर करना शुरू कर दिया। राजनीतिक विश्लेषक इसे नीतीश कुमार की ‘होम्योपैथिक‘ कार्रवाई का प्रभाव मान रहे हैं, जिसमें बिना बड़ा सार्वजनिक विवाद किए पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखा जाता है।
सियासत के जानकार मानते हैं कि आने वाले समय में बांका की राजनीति में गिरधारी यादव और उनके पुत्र के बीच होने वाले विरोधाभास को लेकर और भी हलचल बढ़ सकती है।