Monday, June 22

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‘दोषसिद्धि से पहले जमानत मिलनी ही चाहिए’, उमर खालिद के मामले पर पूर्व CJI चंद्रचूड़ का बड़ा बयान

 

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नई दिल्ली: दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद की जमानत सुप्रीम कोर्ट से नामंजूर किए जाने के बाद पूर्व चीफ जस्टिस (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोष सिद्धि से पहले जमानत (बेल) एक नागरिक का मौलिक अधिकार है और बिना मुकदमे के लंबी जेल संवैधानिक न्याय को कमजोर करती है।

 

रविवार को जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में चंद्रचूड़ ने कहा, “उमर खालिद पांच साल से जेल में हैं। मैं अपने न्यायालय की आलोचना नहीं कर रहा हूं। जमानत की शर्तों का दुरुपयोग रोकने के लिए शर्तें लगाई जा सकती हैं, लेकिन शीघ्र सुनवाई संभव न होने पर जमानत अपवाद नहीं बल्कि नियम होनी चाहिए।”

 

पूर्व CJI ने बताया किन मामलों में जमानत से किया जा सकता है इंकार:

उन्होंने कहा कि अगर आरोपी के समाज में लौट कर फिर से अपराध करने, सबूतों में छेड़छाड़ करने या जमानत का फायदा लेकर कानून के शिकंजे से बच निकलने की संभावना है, तो जमानत से इंकार किया जा सकता है। अन्यथा, जमानत देनी ही होगी। चंद्रचूड़ ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में अदालत से मामले की गहन पड़ताल करने पर भी जोर दिया।

 

मामलों के निपटारे में देरी पर चिंता:

पूर्व सीजेआई ने कहा कि भारतीय आपराधिक न्याय प्रक्रिया में मामलों के निपटारे में देरी चिंता का विषय है। सत्र और जिला अदालतों द्वारा जमानत न देने से प्राधिकार के प्रति अविश्वास बढ़ता है और न्यायाधीशों में डर पैदा होता है कि कहीं उनकी निष्ठा पर सवाल न उठे। यही कारण है कि कई जमानत के मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचते हैं।

 

चंद्रचूड़ ने अपने 24 महीनों के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने लगभग 21,000 जमानत याचिकाओं का निपटारा किया। उनके अनुसार, ऐसे कई मामले होते हैं जिनके बारे में लोग सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करते हैं, जबकि वास्तविकता में जमानत देनी ही चाहिए थी।

 

 

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