
पटना।
बिहार सरकार ने राज्य में विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। मंत्रियों को जिलों का प्रभार सौंपने के बाद अब सरकार ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भी जिलों की जिम्मेदारी दे दी है। इस नई व्यवस्था के तहत अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों को प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है, ताकि योजनाओं की निगरानी और विभागीय समन्वय में किसी तरह की कमी न रह जाए।
मंत्रियों और अफसरों को मिला संयुक्त दायित्व
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष सह प्रभारी मंत्री के मनोनयन से जुड़ी पूर्व की सभी अधिसूचनाओं को निरस्त करते हुए नई व्यवस्था लागू की गई है। अगले आदेश तक मंत्रियों को उनके नाम के सामने अंकित जिलों का प्रभारी मंत्री सह अध्यक्ष नामित किया गया है, वहीं प्रत्येक जिले के लिए एक प्रभारी सचिव भी तय किया गया है।
पटना की कमान सम्राट चौधरी के हाथ
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को राजधानी पटना का प्रभारी मंत्री बनाया गया है। उनके साथ शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंदर को पटना जिले का प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है। माना जा रहा है कि राजधानी में विकास योजनाओं की गति और निगरानी को लेकर सरकार कोई ढील नहीं देना चाहती।
प्रभारी मंत्रियों की प्रमुख सूची
- विजय कुमार सिन्हा – मुजफ्फरपुर, भोजपुर
- विजय कुमार चौधरी – पूर्वी चंपारण, नालंदा
- बिजेंद्र प्रसाद यादव – वैशाली, सारण
- श्रवण कुमार – समस्तीपुर, पूर्णिया
- मंगल पांडेय – दरभंगा, पश्चिम चंपारण
- दिलीप कुमार जायसवाल – भागलपुर, गया
- अशोक चौधरी – सीतामढ़ी, शिवहर, जहानाबाद
- लेशी सिंह – मधुबनी, मधेपुरा
- मदन सहनी – सुपौल, खगड़िया
- राम कृपाल यादव – कैमूर
- संतोष कुमार सुमन – औरंगाबाद
- सुनील कुमार – रोहतास, लखीसराय
- मोहम्मद जमा खान – किशनगंज, शेखपुरा
- संजय सिंह ‘टाइगर’ – बांका
- अरुण शंकर प्रसाद – बेगूसराय
- सुरेंद्र मेहता – कटिहार
- नारायण प्रसाद – गोपालगंज
- रमा निषाद – बक्सर
- लखेंद्र कुमार रौशन – अररिया
- श्रेयसी सिंह – नवादा
- प्रमोद कुमार – सहरसा, सीवान
- संजय कुमार – मुंगेर
- संजय कुमार सिंह – जमुई
- दीपक प्रकाश – अरवल
हर जिले के लिए प्रभारी सचिव
सरकार ने प्रत्येक जिले के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को प्रभारी सचिव बनाया है। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, ग्रामीण विकास, नगर विकास, कृषि, ऊर्जा और अन्य विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव शामिल हैं। इन अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में योजनाओं की समीक्षा, जिला प्रशासन के साथ समन्वय और समयबद्ध क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकार का स्पष्ट संदेश
इस फैसले के जरिए सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि विकास योजनाओं में लापरवाही या ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री और अफसर—दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी से जिलों में कामकाज की नियमित निगरानी होगी और आम जनता तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।