Saturday, January 17

अली खामेनेई के विदेशी शिया लड़ाके, 5000 की फौज ने ईरान में प्रदर्शन कुचला

तेहरान: ईरान में करीब तीन हफ्ते से जारी विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन ने कथित तौर पर विदेश से आए शिया मिलिशिया लड़ाकों की मदद ली। रिपोर्टों के अनुसार, इराक से आए करीब 5,000 शिया लड़ाके धार्मिक तीर्थयात्रियों का बहाना बनाकर ईरान में दाखिल हुए और प्रदर्शनकारियों को कुचलने में सक्रिय भूमिका निभाई।

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मानवाधिकार समूहों और स्थानीय सूत्रों के हवाले से खबर है कि इन मिलिशिया लड़ाकों ने आक्रामक कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिससे करीब 2,600 लोगों की मौत हुई। ईरानी सुरक्षा बलों के कुछ हिस्सों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से हिचकिचाई, लेकिन विदेशी लड़ाकों ने यह कार्य सौंपे जाने के बाद बिना किसी रोक-टोक के कार्रवाई की।

विदेशी मिलिशिया की भूमिका
ये लड़ाके इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) से जुड़े समूहों—जैसे कताइब हिजबुल्लाह, हरकत हिजबुल्लाह अल-नुजाबा, कताइब सैय्यद अल-शुहदा और बदर संगठन—के सदस्य थे। इनके बसों और मार्गों के माध्यम से ईरान में प्रवेश को धार्मिक तीर्थयात्रा दिखाया गया। यूरोपीय और इराकी सैन्य सूत्रों के अनुसार, अधिकांश लड़ाके दो दक्षिणी सीमा चौकियों—मेसोन प्रांत के शैब और वासित प्रांत के जुरबतिया—के रास्ते ईरान में दाखिल हुए।

संगठित प्रवेश और कार्रवाई
इन लड़ाकों ने एक जैसी काली टी-शर्ट पहनी थी और उनमें कोई बुजुर्ग या परिवार नहीं था। इस व्यवस्था से यह स्पष्ट होता है कि उनकी तैनाती व्यवस्थित और रणनीतिक थी। स्थानीय मानवाधिकार समूहों और ईरानी पत्रकारों के अनुसार, इन मिलिशिया लड़ाकों ने हमादान और अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शनों को दबाने का काम संभाला।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरानी शासन के इस कदम की आलोचना हो रही है। रॉयटर्स और CNN सहित कई मीडिया सूत्रों के मुताबिक, इन खूनी कार्रवाईयों ने फिलहाल विरोध प्रदर्शनों को बड़े पैमाने पर शांत कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई न केवल ईरान की आंतरिक राजनीति पर असर डाल रही है, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और विदेशी शिया समूहों की गतिविधियों को भी प्रभावित कर रही है।

 

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