
क्या किसी भर्ती परीक्षा की वेटिंग लिस्ट में नाम आ जाना सरकारी नौकरी की गारंटी होता है? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने देशभर के हजारों प्रतियोगी अभ्यर्थियों की उम्मीदों को झकझोर कर रख दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने साफ शब्दों में कहा है कि रिजर्व या वेटिंग लिस्ट की एक तय वैधता अवधि होती है और उसके बाद नियुक्ति का कोई कानूनी अधिकार नहीं बचता।
यह फैसला राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) से जुड़ी कनिष्ठ विधि अधिकारी (JLO) और सहायक सांख्यिकी अधिकारी भर्ती मामले में सुनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश को पूरी तरह पलट दिया है, जिसमें वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए गए थे।
हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने की। पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि मुख्य सूची के कुछ चयनित अभ्यर्थियों ने जॉइन नहीं किया, वेटिंग लिस्ट के उम्मीदवार नियुक्ति की मांग नहीं कर सकते।
यति जैन और विवेक मीणा समेत कई अभ्यर्थियों ने यह कहते हुए राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया था कि जब चयनित उम्मीदवारों ने पद ग्रहण नहीं किया, तो रिक्त पदों पर वेटिंग लिस्ट से नियुक्ति होनी चाहिए। हाईकोर्ट की सिंगल और डिवीजन बेंच ने आयोग को नियुक्ति देने का आदेश दिया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
छह महीने बाद खत्म हो जाती है वेटिंग लिस्ट
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सेवा नियमों का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य चयन सूची भेजे जाने की तारीख से वेटिंग लिस्ट केवल छह महीने तक ही मान्य रहती है। इस अवधि के बाद वह स्वतः समाप्त हो जाती है और किसी भी प्रकार का दावा कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं रहता।
पीठ ने टिप्पणी की कि यदि चयन प्रक्रिया को अनिश्चित समय तक खींचा जाए, तो इससे नई भर्तियों की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के अवसर प्रभावित होते हैं। नियमों की अनदेखी कर सहानुभूति के आधार पर फैसले नहीं दिए जा सकते।
RPSC की स्वायत्तता को मिला समर्थन
यह फैसला राजस्थान लोक सेवा आयोग के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने RPSC को एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था बताते हुए कहा कि नियमों की शुचिता बनाए रखना आयोग का दायित्व है।
आयोग के संयुक्त विधि परामर्शी राकेश ओझा के अनुसार, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही राज्य सरकार अपील न करे, लेकिन आयोग को नियमों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने का पूरा अधिकार है।
अभ्यर्थियों के लिए अहम संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवारों के प्रति सहानुभूति तो जताई, लेकिन दो टूक कहा कि नियम, समय-सीमा और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता से ऊपर कुछ भी नहीं हो सकता। यह फैसला भविष्य की सभी भर्तियों के लिए एक अहम नजीर माना जा रहा है।