Saturday, January 17

मालवीय के बाद अब किसकी बारी? कांग्रेस वॉर रूम की हलचल से भाजपा में बढ़ी बेचैनी

 

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राजस्थान की राजनीति में ठंड के मौसम के साथ-साथ सियासी तापमान भी लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस के प्रदेश वॉर रूम से आई एक अहम बैठक की खबर ने सत्तारूढ़ भाजपा के खेमे में हलचल मचा दी है। पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय की संभावित घर वापसी के साथ ही कांग्रेस ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में राज्य की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।

 

शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वॉर रूम में हुई अनुशासन कमेटी की बैठक को इसी कड़ी में बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक में न केवल मालवीय, बल्कि भाजपा में गए सात प्रमुख नेताओं की वापसी पर गंभीर मंथन किया गया।

 

सात नेताओं की वापसी पर मंथन

 

अनुशासन कमेटी के अध्यक्ष उदयलाल आंजना ने बैठक के बाद बताया कि मालवीय समेत सात नेताओं की कांग्रेस में पुनः वापसी के प्रस्ताव पर चर्चा हुई है। इनमें कांता भील, खिलाड़ीलाल बैरवा, कैलाश मीणा, सुभाष तंबोली और गोपाल गुर्जर जैसे प्रभावशाली नाम शामिल हैं।

 

आंजना ने कहा, “ये सभी नेता पार्टी परिवार का हिस्सा रहे हैं। अब उन्हें यह एहसास हो गया है कि कांग्रेस ही उनकी सियासी जमीन है।” कमेटी शनिवार तक अपनी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को सौंपेगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय दिल्ली आलाकमान द्वारा लिया जाएगा।

 

भाजपा में भी असंतोष के सुर

 

बैठक के दौरान पूर्व मंत्री शकुंतला रावत के बयान ने राजनीतिक गलियारों में सनसनी फैला दी। उन्होंने दावा किया कि केवल कांग्रेस छोड़कर गए नेता ही नहीं, बल्कि भाजपा के कई मूल और सक्रिय नेता भी कांग्रेस के संपर्क में हैं। रावत के अनुसार, भाजपा की कार्यशैली और आंतरिक हालात से असंतुष्ट नेताओं में बेचैनी बढ़ रही है और जल्द ही बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकता है।

 

लाभ-हानि का सियासी आकलन

 

बैठक में इस बात पर भी गहन चर्चा हुई कि इन नेताओं की वापसी का ज़मीनी स्तर पर क्या असर पड़ेगा। जिलाध्यक्षों से फीडबैक लिया गया कि कहीं इससे स्थानीय कार्यकर्ताओं में असंतोष तो नहीं फैलेगा। कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल हर पहलू पर संतुलित निर्णय लेने के मूड में दिख रहा है।

 

सियासी संकेत साफ

 

महेंद्रजीत सिंह मालवीय की संभावित घर वापसी ने जहां भाजपा खेमे में चिंता की लकीरें खींच दी हैं, वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिल रहा है। अब सबकी निगाहें शनिवार के फैसले और दिल्ली आलाकमान की मुहर पर टिकी हैं, जो राजस्थान की राजनीति की दिशा तय कर सकती है।

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