
ब्रसेल्स/नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) दुनिया की सबसे बड़ी व्यापारिक समझौता डील पर पहुंचने के बेहद करीब हैं। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को बताया कि 24 में से 20 चैप्टर पर दोनों पक्षों ने सहमति बना ली है और लक्ष्य इस महीने के अंत तक डील को फाइनल करना है, ताकि EU नेताओं की भारत यात्रा से पहले इसे पूरा किया जा सके।
इस समझौते की औपचारिक घोषणा भारत में होने वाले 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन के दौरान होगी। इसमें यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
डील क्यों है ग्लोबल गेमचेंजर?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता भारत की 1.4 अरब आबादी को EU की 450 मिलियन आबादी से जोड़ देगा। दोनों मिलाकर यह दुनिया की कुल आबादी का 25 प्रतिशत हिस्सा बनाता है। इसके अलावा, यह डील दुनिया की टॉप पांच इकोनॉमी में से दो को सीधे जोड़ता है।
भारत के लिए यह डील रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाए हुए हैं। अगर भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट फाइनल होता है, तो इसका असर अमेरिकी टैरिफ पर भी पड़ेगा। इसके अलावा, EU के लिए कृषि, ऑटोमोबाइल और कार्बन टैक्स जैसे मुद्दे संवेदनशील हैं, जिन पर अभी भी बातचीत चल रही है।
डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप की व्यापारिक नीतियों और भारत पर दबाव ने EU और भारत दोनों को तेजी से डील फाइनल करने के लिए मजबूर किया। पिछले साल भारत ने तीन बड़े ट्रेड डील फाइनल किए थे, जबकि EU ने दक्षिण अमेरिकी ब्लॉक Mercosur के साथ लंबित डील को साइन किया।
भारत का अवसर और वैश्विक प्रभाव
इस डील के पूरा होने से भारत मिडिल क्लास के बढ़ते बाजार और तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था के कारण यूरोपियन कंपनियों के लिए सबसे बड़े बाजार में बदल जाएगा। भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट दुनिया में सबसे ज्यादा है और 2030 तक यह दुनिया का सबसे बड़ा कंज्यूमर मार्केट बन सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह डील भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और विश्व व्यापार में रणनीतिक भूमिका निभाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।