
पेरिस/वॉशिंगटन: फ्रांस ने अमेरिका के ग्रीनलैंड पर कब्जे के विचार का कड़ा विरोध किया है। फ्रांसीसी सरकार ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड में कोई सैन्य कार्रवाई करना “हद पार करना” होगा और इससे पूरी तरह से नई दुनिया का निर्माण हो सकता है।
फ्रांस के वित्त मंत्री रोलैंड लेस्क्योर ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि ग्रीनलैंड एक संप्रभु देश का हिस्सा है और यूरोपीय संघ (EU) में आता है, इसलिए इसके साथ कोई छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी हमले की कोशिश से अमेरिका और EU के बीच आर्थिक संबंधों को गंभीर खतरा होगा।
फ्रांस का सख्त रुख
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट किया है कि फ्रांस और यूरोपीय देशों की सुरक्षा और क्षेत्रीय संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसके चलते फ्रांस ने नाटो के सहयोगी देशों—डेनमार्क, जर्मनी, स्वीडन और नॉर्वे—के साथ मिलकर ग्रीनलैंड में सैनिकों और सैन्य संपत्तियों को तैनात किया है।
अमेरिका और डेनमार्क के बीच तनातनी
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि अमेरिका के साथ ग्रीनलैंड को लेकर मतभेद कायम हैं। हालिया बातचीत सफल नहीं रही और अमेरिका की महत्वाकांक्षा ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बरकरार है। फ्रेडरिक्सन ने बताया कि इस मुद्दे पर एक कार्य समूह गठित किया जाएगा, लेकिन बुनियादी असहमति बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रीनलैंड पर अमेरिका की महत्वाकांक्षा और फ्रांस तथा नाटो देशों की कड़ी प्रतिक्रिया अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और भू–राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।