
नई दिल्ली: चीन और पाकिस्तान के क्राइम सिंडिकेट मिलकर भारत में साइबर स्लीपर सेल तैयार कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने हाल ही में इस नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ऋतिक और उसके सहयोगी पाकिस्तान के हैंडलरों के संपर्क में थे। उन्होंने भारतीय क्रिप्टो ट्रेडर्स के UPI ID और बैंक अकाउंट का इस्तेमाल कर पाकिस्तान स्थित संदिग्धों को डिजिटल ट्रांजैक्शन कराने का काम किया। इसके लिए उन्हें 5% कमीशन मिलता था। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज और सिम कार्ड के जरिए साइबर स्लीपर सेल के लिए स्थानीय लोगों को आकर्षित किया।
पुलिस ने पकड़े गए अन्य सदस्य तनवीर आलम उर्फ हैदर का खुलासा किया, जो पाकिस्तान स्थित हैकरों से सीधे जुड़ा था। यह समूह भारतीय रक्षा संस्थानों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहा है। हाल की जांच में लगभग 16 लाख साइबर हमलों की कोशिशें सामने आईं, जिनमें से अधिकांश को सुरक्षा एजेंसियों ने नाकाम किया।
साइबर स्लीपर सेल के संचालन में शामिल तरीके:
म्यूल अकाउंट और फर्जी दस्तावेज के जरिए सिम कार्ड और बैंक अकाउंट खोलवाना।
डिजिटल अरेस्ट और फ्रॉड ट्रांजैक्शन पर 5–10% कमीशन।
विदेशी हैंडलरों के निर्देश पर USDT क्रिप्टोकरेंसी की लेन-देन facilitation।
सोशल मीडिया प्रोफाइल की रेकी और फर्जी लोन कॉल सेंटर का संचालन।
जांच में यह भी पता चला कि चीन-पाकिस्तान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम सिंडिकेट ने लगभग ₹100 करोड़ के स्कैम का संचालन किया, जिसमें 22 सिम बॉक्स, 20,000 से अधिक सिम कार्ड और 120 फिजिकल सिम जब्त किए गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह खतरा केवल आर्थिक फ्रॉड तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। नागरिकों को साइबर सुरक्षा पर विशेष सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करने की सलाह दी गई है।
साइबर क्राइम रिपोर्टिंग:
पोर्टल: Cybercrime.gov.in
हेल्पलाइन: 1930
नजदीकी पुलिस थाने में जाकर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।