


114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट की खरीद में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता; फ्रांस के साथ डील जल्द ही रक्षा अधिग्रहण परिषद को भेजी जाएगीनई दिल्ली: भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए हो रहे 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) या राफेल जेट सौदे में सोर्स कोड का ट्रांसफर अनिवार्य होगा और इसमें कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि वायु सेना की आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, इन विमानों में भविष्य में जरूरत पड़ने पर स्वदेशी हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकेगा और दूसरे विमानों के साथ कनेक्टिविटी भी अनिवार्य होगी। यह कदम वायुसेना की क्षमता को लंबी अवधि तक बनाए रखने और मौजूदा स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमानों (LCA तेजस), विकसित तेजस-मार्क-2 और पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी स्टील्थ एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के साथ तालमेल सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
राफेल जेट की खरीद का प्रस्ताव जल्द ही रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council) को भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे कैबिनेट की रक्षा मामलों की समिति (CCS) की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसके बाद डील पर अंतिम मुहर लगेगी और कीमतों को लेकर असली मोलभाव शुरू होगा।
वर्तमान में भारतीय वायु सेना के पास लड़ाकू विमानों की संख्या 2012 में तय किए गए स्तर से काफी कम है। HAL द्वारा हल्के और मध्यम लड़ाकू विमानों के विकास में अभी समय लगेगा, इसलिए वायु सेना के लिए भरोसेमंद और तुरंत उपलब्ध विकल्प के तौर पर राफेल जेट उपयुक्त माना जा रहा है। एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने भी अक्टूबर में कहा था कि राफेल या अन्य किसी भी लड़ाकू विमान की प्राथमिकता वायु सेना की जरूरतों को पूरा करना है।


