Tuesday, June 16

This slideshow requires JavaScript.

सुप्रीम कोर्ट से जस्टिस यशवंत वर्मा को झटका, महाभियोग प्रस्ताव पर याचिका खारिज

 

This slideshow requires JavaScript.

अदालत ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत जांच समिति गठन चुनौती खारिज की; महाभियोग प्रक्रिया के लिए रास्ता साफ नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के तहत न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार जांच समिति के गठन को चुनौती दी थी।

 

जस्टिस वर्मा के खिलाफ यह महाभियोग प्रस्ताव उनके आधिकारिक आवास से बरामद नकदी के बाद पेश किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया के तहत आगे की जांच का रास्ता साफ हो गया है।

 

8 जनवरी को जस्टिस वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और लोकसभा सचिवालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी दलीलें पेश की थीं। शुक्रवार को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र की बेंच ने फैसला सुनाया।

 

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा के तर्क को अस्वीकार किया कि राज्यसभा के उपसभापति के पास किसी प्रस्ताव को अस्वीकार करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार केवल अध्यक्ष और सभापति के पास है।

 

मामले की पृष्ठभूमि यह है कि जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवास पर 14 मार्च को जले हुए नोटों के बंडल मिलने के बाद उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सांसदों ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश करने की मांग उठाई थी।

 

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद महाभियोग प्रक्रिया अब कानूनी रूप से आगे बढ़ सकती है, और जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच समिति गठन की प्रक्रिया पर रोक नहीं रहेगी।

Leave a Reply