Friday, January 16

अब सप्ताह में एक दिन बच्चे अपनी पसंद का कपड़ा पहनकर स्कूल आएंगे, शिक्षा विभाग ने जारी की नई व्यवस्था

 

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जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए शिक्षा विभाग ने एक नई और सकारात्मक पहल की है। अब सप्ताह में एक दिन यानी गुरुवार को स्कूल यूनिफॉर्म पहनना अनिवार्य नहीं होगा। इस दिन छात्र-छात्राएं अपनी पसंद के घरेलू या पारंपरिक कपड़ों में स्कूल आ सकेंगे।

 

छात्रों का आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास प्रमुख उद्देश्य

शिक्षा विभाग का कहना है कि इस कदम से विद्यार्थियों को स्कूल में अधिक सहज और तनावमुक्त वातावरण मिलेगा। यूनिफॉर्म से एक दिन की छूट का उद्देश्य बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाना, रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना और उन्हें पारंपरिक व आधुनिक संस्कृति के बीच संतुलन सीखने में मदद करना है।

 

शिक्षकों पर भी लागू होगा आदेश

यह नई व्यवस्था केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगी। अब शिक्षक भी हर गुरुवार अपनी पसंद के हथकरघा वस्त्र, स्थानीय परिधान या अन्य गरिमामयी पारंपरिक वेशभूषा में विद्यालय आएंगे, जिससे स्कूल परिसर में सकारात्मक और जीवंत सांस्कृतिक माहौल बनेगा।

 

परंपराओं से जुड़ने की मिलेगी प्रेरणा

शिक्षा विभाग का मानना है कि जब विद्यार्थी अपने शिक्षकों को पारंपरिक वेशभूषा में देखेंगे, तो उन्हें स्थानीय संस्कृति और पहनावे को समझने और अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। यह कदम न केवल शिक्षा बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

 

सख्ती से लागू होंगे निर्देश

माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने सभी संयुक्त निदेशक स्कूल शिक्षा को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया जाए।

 

केंद्र सरकार की पहल से प्रेरणा

यह निर्णय केंद्र सरकार के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा भेजे गए विशेष पत्र के आधार पर लिया गया है। पत्र में सुझाव था कि विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा और हथकरघा संस्कृति से जोड़ा जाए।

 

प्रदेश के 68 हजार स्कूलों में लागू

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि यह पहल प्रदेश के लगभग 68 हजार स्कूलों में लागू की जाएगी। इससे 90 लाख से अधिक विद्यार्थियों और हजारों शिक्षकों को सीधा लाभ मिलेगा। मंत्री ने कहा कि इससे स्कूलों में अनुशासन बना रहेगा और सांस्कृतिक विविधता का सुंदर समन्वय देखने को मिलेगा।

 

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