
भदोही: भदोही के लिए यह दिन ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण साबित हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा “काशी नरेश विश्वविद्यालय, भदोही” की स्थापना का अध्यादेश राजपत्र में प्रकाशित हो गया है। अब भदोही सहित आसपास के जिलों के हजारों छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा।
गिरीश पांडेय की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय स्थापना से जुड़ा अध्यादेश 14 जनवरी को उत्तर प्रदेश गजट के एक्स्ट्राऑर्डिनरी अंक में प्रकाशित हुआ। उच्च शिक्षा अनुभाग-1 की अधिसूचना के अनुसार, यह अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 348(3) के तहत विधिवत प्रकाशित किया गया है। प्रमुख सचिव जे.पी. सिंह और विशेष सचिव रविंद्र कुमार के हस्ताक्षर के साथ, इस आदेश की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री कार्यालय, राज्यपाल सचिवालय, विधानमंडल सचिवालय और संबंधित विभागों को भेज दी गई है।
अध्यादेश के तहत काशी नरेश विश्वविद्यालय, भदोही को एक स्वतंत्र राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है। जब तक विश्वविद्यालय के अपने नियम और विनियम लागू नहीं होते, शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के नियमों के अनुसार संचालित होंगे।
शिक्षाविदों का मानना है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना से भदोही और आसपास के जिलों—मिर्जापुर, प्रयागराज, जौनपुर और वाराणसी के सीमावर्ती क्षेत्र—के विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। स्थानीय स्तर पर स्नातक, परास्नातक और शोध के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह विश्वविद्यालय न केवल शिक्षा के क्षेत्र में भदोही को नई पहचान देगा, बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था, रोजगार और बौद्धिक वातावरण को भी मजबूत करेगा। शिक्षकों, शैक्षणिक कर्मचारियों और सहायक सेवाओं के नए अवसर सृजित होंगे।
कुल मिलाकर, काशी नरेश विश्वविद्यालय, भदोही की स्थापना जिले के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी और आने वाले वर्षों में इसे उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनने में मदद मिलेगी।