
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने अपने मंत्रालयों, विभागों और सरकारी कंपनियों के बीच वित्तीय विवादों को जल्दी और प्रभावी ढंग से सुलझाने के लिए नया पैनल बनाने का निर्णय लिया है। इस कदम से अदालतों पर बोझ कम होगा, जनता के पैसे बचेंगे और विवादों का समाधान समयबद्ध तरीके से हो सकेगा।
आपस में समाधान का नया फ्रेमवर्क
अंतर-मंत्रालय पैनल के माध्यम से ऐसे वित्तीय मामलों का निपटारा किया जाएगा, जिनमें निजी पार्टियां शामिल नहीं होंगी। इस व्यवस्था से संबंधित सरकारी संस्थानों को कोर्ट जाने की आवश्यकता नहीं होगी। कैबिनेट सचिवालय ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और इसे अन्य मंत्रालयों के साथ साझा कर दिया गया है।
कैबिनेट सचिव का निर्णय अंतिम
यदि पैनल से विवाद का समाधान नहीं निकलता, तो मामला कैबिनेट सचिव के पास जाएगा। उनके फैसले को अंतिम माना जाएगा और इसके खिलाफ अपील की संभावना नहीं होगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब विभागों के भीतर ही विवाद आसानी से हल हो सकता है, तो कोर्ट में मामलों का लंबित रहना और महीनों खींचना क्यों जरूरी है। इससे न केवल विवाद जल्दी सुलझेंगे, बल्कि मंत्रालयों और विभागों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।
समयबद्ध प्रक्रिया और ट्रैकिंग
फरवरी 2025 में कानून मंत्रालय ने राज्यसभा को बताया था कि अदालतों में लंबित लगभग 7,00,000 मामलों में केंद्र सरकार पक्षकार है, जिनमें अकेले 2,00,000 मामले वित्त मंत्रालय से जुड़े हैं। नए पैनल के तहत विवादों को 30 दिनों के भीतर भेजा जाएगा और तीन महीने के भीतर फैसला किया जाएगा। फैसले को लागू करने का समय एक महीने होगा। इसके अलावा, पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ट्रैक की जाएगी और हर महीने कैबिनेट को रिपोर्ट भेजी जाएगी। सरकारी संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि सभी लंबित विवाद 31 मार्च तक नए पैनल के अंतर्गत समाधान के लिए वापस ले लें।
