
नई दिल्ली: अमेरिका की दादागिरी और टैरिफ नीतियों ने वैश्विक भू-राजनीति को नई दिशा दी है। ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी, ईरान पर सैन्य कार्रवाई और भारत-चीन पर 500 फीसदी टैरिफ की चेतावनी—अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में अहंकारी तेवर दिखा रहे हैं। सीधे सैन्य संघर्ष की संभावना कम है, लेकिन आर्थिक और वित्तीय दबाव से अमेरिका को वैश्विक स्तर पर चुनौती दी जा सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, भारत और चीन यदि सामूहिक रूप से अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियों की बड़े पैमाने पर बिक्री करें, तो अमेरिका की अर्थव्यवस्था को खरबों डॉलर का नुकसान पहुँच सकता है। अमेरिका का सकल राष्ट्रीय ऋण अब लगभग 38.43 ट्रिलियन डॉलर है, जिसमें जनता पर 30.80 ट्रिलियन डॉलर का बोझ है। बढ़ते ब्याज भुगतान और विदेशी निवेशकों पर निर्भरता अमेरिकी आर्थिक कमजोरी को और बढ़ा रही है।
भारत–चीन गठजोड़ से अमेरिका को चुनौती
चीन ने अमेरिका पर अपनी आर्थिक ताकत दिखाने के लिए रेयर अर्थ उत्पादन और सोयाबीन- मक्का की सप्लाई सीमित कर दी है। इसके अलावा, भारत-चीन के संबंधों में सुधार और रूस-भारत-चीन (RIC) गठबंधन के संकेत अमेरिका के लिए चेतावनी हैं। भारत और चीन के बढ़ते सहयोग से QUAD (अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, भारत) को संतुलित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भारत की रणनीतिक स्थिति
भारत अमेरिका के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत रखते हुए चीन पर भी संतुलन बनाए रख रहा है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि चीन से भारत कई महत्वपूर्ण घटकों, जैसे सौर पैनल के पुर्जों में, अत्यधिक निर्भर है। मोदी-शी जिनपिंग की हालिया बैठक और सीमा विवाद सुलझाने के लिए उच्च स्तरीय वार्ता ने द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने में मदद की है।
BRICS और वैश्विक मुद्रा नीति में भारत की अहमियत
भारत BRICS का अध्यक्ष बनने के बाद रूस, चीन और अन्य देशों के साथ लोकल करेंसी में कारोबार की पहल कर रहा है। इस कदम से अमेरिका पर दबाव बढ़ा है, क्योंकि BRICS के 300 करोड़ की आबादी और 77 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम कर रही है।
अमेरिका भारत को अपना सहयोगी मानता है
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में भारत को ‘सच्चा मित्र’ बताया। अमेरिका फरवरी में अपनी अगुवाई वाले पैक्स सिलिका समूह में भारत को शामिल करने के लिए आमंत्रित करेगा। भारत की चिप डिजाइन, सिलिका और एआई में अग्रणी स्थिति इसे अमेरिका के लिए रणनीतिक दृष्टि से अहम बनाती है।
विश्लेषकों के अनुसार, वर्तमान समय में भारत-चीन के सामूहिक कदम और BRICS मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका अमेरिका की हिटलरी ढीली कर सकती है और वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों में बदलाव ला सकती है।