Thursday, January 15

कोरोना से पहले लगाए 10 लाख, आज बन गए 37.76 लाख, जानिए किस निवेश ने दिया जबरदस्त रिटर्न

मुंबई। शेयर बाजार में लंबे समय तक टिके निवेश का फायदा कितना बड़ा हो सकता है, इसकी मिसाल आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इंडिया ऑपर्च्युनिटीज फंड ने पेश की है। कोरोना महामारी से ठीक एक साल पहले, जनवरी 2019 में इस फंड में किया गया 10 लाख रुपये का निवेश सात साल में बढ़कर 37.76 लाख रुपये हो गया। यानी इस दौरान निवेशकों को औसतन 21.02 प्रतिशत का सालाना रिटर्न मिला।

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यह स्कीम 15 जनवरी 2019 को लॉन्च हुई थी। उस समय घनश्याम (काल्पनिक नाम) जैसे कई निवेशकों ने इसमें निवेश किया था। 31 दिसंबर 2025 तक उनके निवेश की वैल्यू लगभग चार गुना के करीब पहुंच गई। तुलना करें तो अगर यही रकम इसके बेंचमार्क निफ्टी 500 टीआरआई में लगाई जाती, तो यह बढ़कर करीब 28.05 लाख रुपये होती, यानी सालाना करीब 15.97 प्रतिशत का रिटर्न।

क्या है यह स्कीम?

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इंडिया ऑपर्च्युनिटीज फंड एक ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम है, जो स्पेशल सिचुएशन थीम पर आधारित है। यह स्कीम बाजार में पैदा होने वाले खास मौकों की पहचान कर उनमें निवेश करती है। बीते सात वर्षों में इस फंड ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, इस स्कीम ने

  • 1 साल में करीब 13 प्रतिशत,
  • 3 साल में लगभग 23 प्रतिशत,
  • 5 साल में करीब 27 प्रतिशत
    और 7 साल में औसतन 21 प्रतिशत से ज्यादा का सालाना रिटर्न दिया है।

कैसे करता है निवेश?

यह फंड बॉटम-अप स्ट्रैटेजी अपनाता है, यानी शेयरों का चुनाव कंपनी की बुनियादी मजबूती के आधार पर किया जाता है। इसमें मार्केट कैप या किसी खास सेक्टर की कोई पाबंदी नहीं है। फंड का मानना है कि अनिश्चितता के दौर—जैसे आर्थिक सुस्ती, नीतिगत बदलाव, भू-राजनीतिक घटनाएं या कारोबार में अस्थायी रुकावट—अक्सर बाजार में मिसप्राइसिंग के मौके पैदा करते हैं। ऐसे में यह स्कीम उन कंपनियों में निवेश करती है, जिनकी समस्याएं अस्थायी हों लेकिन दीर्घकालीन आधार मजबूत हो।

स्पेशल सिचुएशन से कमाई का मौका

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के ईडी और सीआईओ एस. नरेन, जो इस फंड के मैनेजर भी हैं, का कहना है कि स्पेशल सिचुएशन निवेश ऐसे खास मौके होते हैं, जब बाजार किसी कंपनी की असली क्षमता को पूरी तरह नहीं पहचान पाता। अगर सही समय पर ऐसे अवसरों को पकड़ा जाए, तो लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिल सकता है। हालांकि, कम समय में इसमें उतार-चढ़ाव भी रह सकता है, इसलिए इसमें गहरी रिसर्च और धैर्य जरूरी है।

डाइवर्सिफाइड और चुना हुआ पोर्टफोलियो

31 दिसंबर 2025 तक इस फंड के पोर्टफोलियो में लार्ज-कैप शेयरों की हिस्सेदारी ज्यादा रही। इसमें फाइनेंशियल्स, आईटी, फार्मा, कंस्ट्रक्शन समेत कई सेक्टर शामिल थे। यह दिखाता है कि यह स्कीम न सिर्फ मौके आधारित है, बल्कि अच्छी तरह डाइवर्सिफाइड भी है।

कुल मिलाकर, यह उदाहरण बताता है कि अगर सही फंड में सही समय पर और लंबी अवधि के लिए निवेश किया जाए, तो बाजार की उतार-चढ़ाव भरी राह भी शानदार मुनाफे में बदल सकती है।

 

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