
अगर आपका बच्चा बात-बात पर उल्टा जवाब देता है, जोर-जोर से रोता है या जिद करता है, तो उसे सिर्फ क्यूट समझकर नजरअंदाज करना बिल्कुल भी सही नहीं है। पेडियाट्रिशियन डॉ. रोहित भारद्वाज कहते हैं कि शुरुआत में अनदेखा करने से ये आदतें बच्चे की पर्सनैलिटी पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं।
बच्चे के लेवल पर जाएं और आंखों में आंखें डालकर बात करें
डॉ. भारद्वाज के अनुसार, अगर बच्चा आपकी बात अनसुनी करता है, तो दूर से चिल्लाने की बजाय उसके पास जाएं, उसके स्तर पर बैठें और आंखों में आंखें डालकर बात करें। इससे बच्चा आपकी बात को गंभीरता से लेता है और उसका ध्यान भटकता नहीं है।
नाराजगी है, बदतमीजी नहीं
बच्चे को समझाएं कि गुस्सा आना सामान्य है, लेकिन बदतमीजी करना सही नहीं। मार-पीट या जोर-जोर से चिल्लाने से सिर्फ अस्थायी प्रभाव होता है, लंबी अवधि में यह बच्चे के व्यवहार में सुधार नहीं लाता।
झूठ बोलने की आदत को नजरअंदाज न करें
यदि बच्चा खेलते समय दोस्तों के सामने झूठ बोलता है या छोटी बातें छिपाता है, तो इसे भी शुरुआत में ही सुधारना जरूरी है। छोटी उम्र में सुधार न करने से किशोरावस्था में यह आदत और गहरी हो सकती है और भरोसा तोड़ने का रास्ता आसान बन जाता है।
बच्चे को मेहनत करना सिखाएं
बच्चे की हर मांग तुरंत पूरी न करें। उम्र के मुताबिक छोटे-छोटे टास्क दें और उसे पूरा करने के बाद ही इच्छित चीज दें। इससे बच्चा मेहनत की अहमियत और आपकी कोशिशों की कदर करना सीखता है।
निष्कर्ष
बच्चे की बदतमीजी या जिद को क्यूट समझकर इग्नोर करना उसकी पर्सनैलिटी और सामाजिक व्यवहार के लिए नुकसानदायक हो सकता है। शुरुआत में ही सही तरीके से मार्गदर्शन और सीमाएं तय करने से बच्चे का व्यवहार सुधारा जा सकता है।