
जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शहर के नालों के दूषित पानी से सब्जी उगाए जाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने सरकार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सुझावों पर तुरंत अमल कर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई 2 फरवरी को होगी।
हाईकोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, शहर के ओमती नाला, मोती नाला, खूनी नाला और उदरना नाले सहित अन्य नालों में भारी मात्रा में फेकल कोलीफॉर्म और बीओडी पाया गया, जो निर्धारित मानक सीमा से कहीं अधिक है। यह पानी पीने, नहाने और खेती सहित किसी भी उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है।
जबलपुर में प्रतिदिन 174 मेगा लीटर वेस्ट वाटर नालों में जाता है, जबकि नगर निगम द्वारा 13 सीवेज प्लांट्स के जरिए केवल 58 मेगा लीटर का ही ट्रीटमेंट किया जाता है। ट्रीटमेंट के बाद यह पानी नर्मदा और हिरन नदी में मिलाया जाता है।
जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए डेमोक्रेटिक लॉयर फोरम ने सुझाव दिया कि मामले की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाए, जिसमें महापौर, कलेक्टर, निगमायुक्त और संबंधित विभागों के प्रमुख, सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता शामिल हों।
हाईकोर्ट ने इस आवेदन पर सुनवाई लंबित रखते हुए प्रदूषण बोर्ड के सुझावों पर तुरंत कार्रवाई करने और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए।