Friday, June 19

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PMO का नया पता: आज से ‘सेवा तीर्थ’ में काम करेंगे प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली: मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर आज से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का पता बदल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दफ्तर अब ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक से शिफ्ट होकर सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत बने अत्याधुनिक सेवा तीर्थ’ कॉम्प्लेक्स में कार्य करेगा। यह बदलाव प्रशासनिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

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सेवा तीर्थ-1’ में होगा प्रधानमंत्री कार्यालय

प्रधानमंत्री कार्यालय को सेवा तीर्थ-1’ नामक नई बिल्डिंग में स्थानांतरित किया गया है। इस भवन को आधुनिक वर्कस्पेस, उच्च स्तरीय बैठक कक्षों और भव्य सेरेमोनियल हॉल्स के साथ ‘सेवा’ की भावना को केंद्र में रखकर डिजाइन किया गया है।
इसी परिसर में—

  • सेवा तीर्थ-2 में पहले से कैबिनेट सचिवालय काम कर रहा है (सितंबर 2025 से),
  • सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) का कार्यालय होगा।

एक युग का अंत

भारत की आज़ादी के बाद से ही प्रधानमंत्री का दफ्तर साउथ ब्लॉक में स्थित था। आज PMO के वहां से स्थानांतरण के साथ एक ऐतिहासिक दौर का अंत हो गया। साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को भविष्य में एक भव्य सार्वजनिक संग्रहालय—युगे युगीन भारत संग्रहालय’—में बदला जाएगा।

सेवा तीर्थ परिसर की खासियत

पूरे सेवा तीर्थ (एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव) परिसर का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने लगभग 1,189 करोड़ रुपये की लागत से किया है। यह परिसर करीब 2.26 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला है। संग्रहालय परियोजना के तकनीकी विकास के लिए 19 दिसंबर 2024 को फ्रांस की म्यूजियम डेवलपमेंट एजेंसी के साथ समझौता भी किया जा चुका है।

औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति का विजन

PMO का स्थानांतरण प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन के अनुरूप है, जिसके तहत औपनिवेशिक प्रतीकों को पीछे छोड़कर नए भारत की पहचान गढ़ी जा रही है। इससे पहले राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया जा चुका है। इसके अलावा प्रधानमंत्री के लिए एक नया आधिकारिक आवास भी पास ही एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव पार्ट-2’ के रूप में निर्माणाधीन है।

आधुनिक प्रशासन की दिशा में कदम

केंद्र सरकार प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (CCS) की कई नई इमारतें भी विकसित कर रही है, ताकि अलग-अलग जगहों पर फैले मंत्रालयों को एक ही परिसर में लाया जा सके। इसी क्रम में कर्तव्य भवन का उद्घाटन पिछले वर्ष अगस्त में हुआ था, जहां कई मंत्रालय पहले से काम कर रहे हैं।

निष्कर्ष:
PMO का ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरण केवल एक पता बदलने की घटना नहीं, बल्कि आधुनिक, दक्ष और आत्मनिर्भर प्रशासन की ओर बढ़ते भारत का प्रतीक है। यह कदम आने वाले वर्षों में शासन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

 

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