
पटना: बिहार में नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ से पहले राज्य की ग्रामीण सड़कों को डबल लेन में बनाने का निर्णय लिया गया है। यह पहल सात निश्चय-3 योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी के अनुसार, इस कदम से ग्रामीण कनेक्टिविटी मजबूत होगी, आवागमन आसान होगा और राज्य के विकास को नई गति मिलेगी।
डबल लेन से गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत
अशोक चौधरी ने बताया कि ग्रामीण सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया जा रहा है, जो प्रखंड, अनुमंडल और जिला मुख्यालयों को राज्य एवं राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ती हैं। इन सड़कों का डबल लेन में विस्तार करने से गांवों का विकास और लोगों की सुविधा दोनों सुनिश्चित होगी।
उन्होंने बताया कि पिछले 20 वर्षों में बिहार ने ग्रामीण सड़क निर्माण में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस दौरान विभाग ने लगभग 1,20,000 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया। साथ ही, सात साल की मेंटेनेंस पॉलिसी के तहत इन सड़कों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा रहा है।
सड़कों के निर्माण और मेंटेनेंस का काम जारी
वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण और प्रबंधन कार्यक्रम के तहत 18,166 सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल लंबाई लगभग 30,965 किलोमीटर है। मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना और ग्राम सम्पर्क योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में 31,604 बसावटों के लिए 43,431 किलोमीटर सड़क बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 34,414 किलोमीटर सड़कों का निर्माण 25,062 बसावटों में पूरा हो चुका है, जबकि शेष परियोजनाओं पर भी कार्य प्रगति पर है।
ग्रामीण टोलों को मुख्य सड़कों से जोड़ा जा रहा
मंत्री ने कहा कि ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना के तहत वर्ष 2016-17 से अनजुड़े ग्रामीण टोलों को मुख्य सड़कों से जोड़ा जा रहा है। अब तक 4,643 टोलों को जोड़ने के लक्ष्य के तहत लगभग 3,977 किलोमीटर सड़क निर्माण पूरा हो चुका है। इस योजना से गांवों तक सुगम आवागमन और विकास सुनिश्चित हो रहा है।