Tuesday, June 16

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खाना नहीं बनाया तो बांके से किया हमला, गर्भवती पत्नी व मासूम बेटे की हत्या; घाटमपुर कांड का आरोपी पति गिरफ्तार

 

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उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के घाटमपुर थाना क्षेत्र से दिल दहला देने वाला घरेलू हिंसा का मामला सामने आया है। यहां खाना न बनने को लेकर हुए विवाद में पति ने बांके से हमला कर गर्भवती पत्नी और ढाई साल के मासूम बेटे की निर्मम हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पति फरार हो गया था, जिसे पुलिस ने सोमवार देर रात गिरफ्तार कर लिया।

 

नशे में घर आया, विवाद के बाद किया हमला

पुलिस के अनुसार, सर्देपुर गांव निवासी सुरेंद्र यादव उर्फ स्वामी (35) रविवार रात करीब 7:30 बजे नशे की हालत में घर पहुंचा और पत्नी रूबी से खाना मांगा। खाना न बनने पर दोनों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गई। गुस्से में आकर सुरेंद्र ने घर में रखे बांके से पत्नी पर ताबड़तोड़ वार कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। नशे की हालत में उसने ढाई साल के बेटे लवांश पर भी हमला कर दिया, जिससे मासूम की भी जान चली गई।

 

घटना के बाद फरार हुआ आरोपी

दोहरी हत्या के बाद आरोपी बांका लेकर मौके से फरार हो गया। कुछ देर बाद जब रूबी का भाई राजू घर पहुंचा तो उसने दोनों के रक्तरंजित शव पड़े देखे। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए आरोपी की तलाश शुरू कर दी।

 

रेलवे गार्ड बनकर इंस्पेक्टर ने दबोचा आरोपी

घाटमपुर इंस्पेक्टर दिनेश सिंह बिष्ट को सोमवार को सूचना मिली कि आरोपी जंगल के रास्ते भागने की फिराक में है। इसके बाद इंस्पेक्टर ने रणनीति के तहत रेलवे गार्ड की वेशभूषा पहनकर इलाके में घेराबंदी की और गांव के पास से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त बांका और घटना के समय पहनी जैकेट भी बरामद कर ली है, जिसे उसने गेहूं के खेत में छिपा रखा था।

 

डीसीपी ने दी जानकारी

डीसीपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। मंगलवार को उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेजा जाएगा। पुलिस हिरासत में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि खाना न मिलने के कारण गुस्से में उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया।

 

पोते की मौत पर फूट-फूटकर रोई बुजुर्ग मां

घटना के बाद आरोपी की 90 वर्षीय मां सियादुलारी अपने घर के पास मैदान में बदहवास हालत में बैठी मिलीं। पोते को याद कर वह फूट-फूटकर रो पड़ीं। उन्होंने बताया कि सुरेंद्र अपने बेटे को पढ़ाना चाहता था और अक्सर कहता था कि चाहे मजदूरी करनी पड़े, लेकिन बेटे को जरूर पढ़ाएगा। उन्होंने सवाल उठाया— “जिस बेटे के लिए वह इतना करता था, वही हाथ कैसे उठा दिया?”

 

इस हृदयविदारक घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है और एक बार फिर घरेलू हिंसा व नशे की लत के भयावह परिणामों को उजागर किया है।

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