
डायबिटीज आज के समय में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोगों को प्रभावित करने वाली एक आम बीमारी बन चुकी है। WHO के अनुसार, भारत में 18 साल से ऊपर करीब 7.7 करोड़ लोग टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि लगभग 2.5 करोड़ लोग प्रीडायबिटीज की स्थिति में हैं।
डायबिटीज में शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नामक हॉर्मोन नहीं बनाता, या इसका सही उपयोग नहीं कर पाता। इसका परिणाम है उच्च ब्लड शुगर, जो लंबे समय तक बिना कंट्रोल रहने पर कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुँचा सकता है।
हालांकि शुरुआती दौर में ही सही आदतों और डाइट को अपनाकर डायबिटीज को मैनेज किया जा सकता है। डाइटीशियन और टाइप-2 डायबिटीज एक्सपर्ट डायना लिकाल्जी ने कुछ आदतें बताईं, जिन्हें अपनाकर ब्लड शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है।
- सैचुरेटेड फैट का कम सेवन
डायबिटीज रिपोर्ट आने के बाद रोजाना 10 ग्राम से कम सैचुरेटेड फैट का सेवन करें। अत्यधिक सैचुरेटेड फैट मसल्स और लिवर सेल्स में जमा होकर इंसुलिन सिग्नलिंग में बाधा डालता है, जिससे इंसुलिन रेसिस्टेंस और फास्टिंग ब्लड शुगर बढ़ सकता है। - रेजिस्टेंस ट्रेनिंग
सप्ताह में 2-3 बार रेजिस्टेंस ट्रेनिंग करें। निचले शरीर की मांसपेशियां (क्वाड, ग्लूट्स, हैमस्ट्रिंग) विशेष रूप से ग्लूकोज अवशोषित करती हैं। इन्हें सक्रिय करने से ब्लड शुगर तेजी से नियंत्रित होता है और इंसुलिन रेसिस्टेंस में सुधार आता है। - फाइबर का सेवन बढ़ाएं
डेली डाइट में 25-38 ग्राम फाइबर शामिल करें। फाइबर ग्लूकोज अवशोषण को धीमा करता है, ब्लड शुगर स्पाइक्स कम करता है और आंत के बैक्टीरिया को पोषण देता है, जो इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधारने वाले यौगिक बनाते हैं। - फास्टिंग ब्लड शुगर और वजन ट्रैक करें
फास्टिंग ब्लड शुगर और वजन का नियमित ट्रैक रखना जरूरी है। डेली फास्टिंग ब्लड शुगर इंसुलिन सेंसिटिविटी पर सीधा फीडबैक देता है। वहीं, वीकली वेट ट्रेंड्स से प्रगति पर नजर रखी जा सकती है। - जरूरी सप्लीमेंट लें
डेली रूटीन में सप्लीमेंट शामिल करें। दिन में 1200 मिलीग्राम बर्बेरिन और सोने से पहले 275 मिलीग्राम मैग्नीशियम ग्लाइसीनेट लेने से फास्टिंग ग्लूकोज, ए1सी कम होता है, इंसुलिन रेसिस्टेंट सुधारता है, सूजन घटती है और नींद बेहतर होती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसे किसी दवा या इलाज का विकल्प न मानें। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।