Monday, January 12

5 महीने की लंबी खोज में दिल्ली, यूपी और हरियाणा के 500 गांवों से गुजरकर पुलिस ने 15 साल के लड़के को दिलाया न्याय

 

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बिहार के किशनगंज का 15 वर्षीय किशोर अनिल के चंगुल से आज़ाद हुआ, जिसने उसे बंधक बनाकर डेयरी में काम कराया और चारा काटने वाली मशीन में हाथ कट जाने के बाद सड़क किनारे तड़पता छोड़ दिया। इस घटनाक्रम ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश के लगभग 500 गांवों से होकर गुजरने वाली पांच महीने लंबी पुलिस जांच का मार्ग प्रशस्त किया, जिसमें 10,000 किलोमीटर से अधिक का ईंधन खर्च हुआ।

 

घटना का प्रारंभ

पिछले साल जुलाई में पलवल के बडोली गांव में स्थानीय लोगों को एक कमजोर और अपंग लड़का मिला। 15 वर्षीय किशोर का बायां हाथ मशीन में कट चुका था और उसे सुनसान जगह पर छोड़ दिया गया था। वह अपने अपहरणकर्ता के बारे में ज्यादा कुछ याद नहीं कर पाया, केवल इतना कि उसके नाम अनिल हैं और उनकी दो बेटियां रिया और सिया हैं।

 

सर्जरी से पहले ही भाग निकला

स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और पीसीआर वैन के माध्यम से उसे नूंह के अस्पताल ले जाया गया। सर्जरी की तैयारी के दौरान ही वह नंगे पैर और बिना कपड़ों के भाग निकला। असहनीय दर्द के बावजूद वह पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए नूंह के तुरू बस स्टॉप तक पहुँचा, जहाँ एक शिक्षक ने उसे देखा और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। इसके बाद पुलिस ने किशोर के परिवार—बिहार के किशनगंज में—से संपर्क किया।

 

पुलिस ने हार नहीं मानी

किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत केस दर्ज किया गया। इसके साथ ही, बीएनएस की धारा 118(2), 125, 127(4), 137, 146, 289 और 3(5) के तहत भी मामला दर्ज हुआ।

 

15 वर्षीय लड़का कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश में काम करने गया था। घर लौटते समय बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर पानी लेने के लिए ट्रेन से उतरने के दौरान वह लापता हो गया। उसके अपहरणकर्ता ने उसे डेयरी में काम पर लगाया, हाथ कट जाने के बाद उसे सड़क पर छोड़ दिया और 7,500 रुपये नकद देकर भाग गया।

 

सुराग के आधार पर खोज

जीआरपी अधिकारियों ने केवल नाम और कुछ सूचनाओं के आधार पर हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के यमुना किनारे बसे गांवों की तलाशी शुरू की। कई महीनों की खोज और डिजिटल जांच के बाद अंततः 30 दिसंबर को ग्रेटर नोएडा के मोतीपुर गांव में 28 वर्षीय डेयरी मालिक अनिल को पकड़ा गया।

 

पुलिस का प्रयास और सफलता

एसपी नितिका गहलोत और इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश के नेतृत्व में अंबाला, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत और सोनीपत की जीआरपी टीमें लगातार अनिल की तलाश में जुटी रहीं। अधिकारियों ने अपनी जेब से अतिरिक्त खर्च करके भी लड़के को न्याय दिलाने का प्रयास जारी रखा।

 

इस बहादुरी और मेहनत की बदौलत, आखिरकार पांच महीने बाद पीड़ित किशोर को न्याय मिला और अपहरणकर्ता को पकड़ लिया गया।

 

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