
कैनबरा।
अब तक माना जाता था कि नदियां भी समय के साथ जन्म लेती हैं, अपनी धारा बदलती हैं और अंततः सूख जाती हैं। लेकिन भूवैज्ञानिक शोधों ने इस धारणा को चुनौती दी है। दुनिया की सबसे प्राचीन जानी-मानी नदी आज भी अस्तित्व में है—और वह भारत में नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में बहती है। इस नदी का नाम है फिंके नदी, जिसे स्थानीय अर्रेंटे भाषा में लारापिंटा कहा जाता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार फिंके नदी लगभग 30 से 40 करोड़ वर्ष (300–400 मिलियन साल) पुरानी है। यह नदी डायनासोर के धरती पर आने से भी पहले मौजूद थी। माना जाता है कि जब पृथ्वी पर विशालकाय डायनासोर घूमते थे, तब भी यह नदी अपने मार्ग पर बह रही थी।
रेगिस्तान में बहती अनोखी नदी
ऑस्ट्रेलिया के नॉर्दर्न टेरिटरी में स्थित फिंके नदी अपनी प्रकृति में बेहद अनोखी है। यह अधिकतर समय सूखी रहती है और रेत के बीच छोटे-छोटे जलकुंडों जैसी दिखाई देती है। बारिश के मौसम में ही इसमें पानी बहता है, लेकिन इसके बावजूद इसका भूवैज्ञानिक महत्व असाधारण माना जाता है।
फिंके नदी की शुरुआत मैक्डोनेल रेंज से होती है, जो एलिस स्प्रिंग्स के पश्चिम में स्थित है। यह नदी दक्षिण-पूर्व की दिशा में बहते हुए मध्य ऑस्ट्रेलिया को पार करती है और अंततः सिम्पसन डेजर्ट की रेत में विलीन हो जाती है।
डायनासोर से भी पहले की कहानी
भूवैज्ञानिकों के अनुसार, डायनासोर लगभग 23 करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी पर आए थे, जबकि फिंके नदी उनसे भी करीब 10 करोड़ साल पुरानी है। अपने लंबे अस्तित्व के दौरान इस नदी ने महाद्वीपों के खिसकने, जलवायु परिवर्तन, बड़े पैमाने पर विलुप्तियों और मध्य ऑस्ट्रेलिया के धीरे-धीरे सूखने जैसी घटनाओं को झेला है।
स्थानीय आदिवासियों के लिए आस्था का प्रतीक
फिंके नदी पश्चिमी अर्रेंटे आदिवासी समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। यह नदी उनकी सांस्कृतिक परंपराओं, लोककथाओं और जीवनशैली का अहम हिस्सा रही है। हजारों वर्षों से स्थानीय लोग इस नदी पर निर्भर रहे हैं, इसी कारण आज भी इसे गहरे सम्मान के साथ देखा जाता है।
वैज्ञानिक बहस जारी
हालांकि वैज्ञानिक दुनिया की “सबसे पुरानी नदी” होने के दावे पर पूरी तरह सहमत नहीं हैं। नील, सिंधु और अमेरिका की न्यू रिवर जैसी नदियों को भी लाखों साल पुराना माना जाता है। लेकिन फिंके नदी को खास बनाता है यह तथ्य कि इसका मार्ग लाखों वर्षों से लगभग अपरिवर्तित रहा है।
इसी वजह से फिंके नदी आज भी दुनियाभर के भूवैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करती है और पृथ्वी के प्राचीन इतिहास की एक जीवित गवाह मानी जाती है।