
नई दिल्ली: भारत के यूरोप के साथ रिश्ते तेजी से मजबूत हो रहे हैं। इस महीने होने वाले भारत–यूरोपियन यूनियन शिखर सम्मेलन में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लगने की उम्मीद है। भारत और यूरोप का नजदीक आना, अमेरिका के लिए करारा झटका साबित हो सकता है।
यूरोप का बढ़ता भारत के करीब होना
अमेरिका के साथ भारत की ट्रेड डील अब तक अधर में लटकी है। ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के चक्कर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अनिश्चित नीतियों के बीच भारत ने यूरोप के विकल्प को मजबूती से अपनाया है।
आने वाले दिनों में भारत ने जर्मनी, फ्रांस और पोलैंड के साथ अपने रिश्तों को नई धार देने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। यह कदम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को अमलीजामा पहनाने से पहले कूटनीतिक मजबूती का संकेत है।
हाई–प्रोफाइल यूरोपियन यात्राएं
इस हफ्ते तीन प्रमुख यूरोपीय नेताओं की भारत यात्राएं हो रही हैं:
- जर्मनी: चांसलर फ्रेडरिक मर्ज
- फ्रांस: डिप्लोमेटिक एडवाइजर और जी20 शेरपा इमैनुएल बोन
- पोलैंड: विदेश मंत्री रैडोस्लाव सिकोर्स्की
इन तीनों देशों की GDP यूरोपियन यूनियन की आधी हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करती है, जिसमें जर्मनी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, इसके बाद भारत का स्थान है।
भारत–यूरोप ट्रेड और रणनीति
- जर्मनी: 25 साल की रणनीतिक साझेदारी, कारोबार, निवेश, टेक्नोलॉजी, एजुकेशन और स्किल क्षेत्र में सहयोग बढ़ा।
- फ्रांस: रक्षा और रणनीतिक सहयोग में मजबूती, AI इम्पैक्ट समिट में भारत की भागीदारी।
- पोलैंड: पिछले वर्षों में पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकियों के बीच भारत के लिए नई उम्मीद।
ट्रंप की मनमानी को करारा जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2024 पोलैंड यात्रा और पोलिश पीएम डोनाल्ड टस्क से मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग में सुधार हुआ।
इस तरह से गणतंत्र दिवस के अगले दिन 27 जनवरी को होने वाले भारत–यूरोपियन यूनियन शिखर सम्मेलन से पहले यूरोप के तीन प्रभावशाली देशों की भारत यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मनमानी ट्रेड नीति के लिए करारा संदेश है।
जियो–पॉलिटिक्स में बदलाव
भारत और यूरोप के देशों के बीच लंबे समय से प्रयास जारी थे। हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर फ्रांस और लग्जमबर्ग यात्रा करके आए। भारत-वाइमर ट्रायंगल बैठक में भी फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड के विदेश मंत्री शामिल हुए।
इस तरह, भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच मजबूत आधार तैयार हुआ है, जिसमें जर्मनी, फ्रांस और पोलैंड प्रमुख पिलर बनकर उभरे हैं। यह यूरोपीय कूटनीतिक त्रिकोण भारत के लिए अमेरिका की ट्रेड पैंतरेबाजी का करारा जवाब साबित हो सकता है।