
मेरठ: ‘पापा! उसने मेरी मां छीन ली…’ ये शब्द उस बच्ची रूबी के हैं, जिसने अपनी आंखों के सामने मां की हत्या देखी और खुद को बचाने की हर कोशिश की, लेकिन फरसे और तमंचे की धमकियों के बीच खामोश रहने को मजबूर हो गई। रविवार शाम, आशा ज्योति केंद्र में पिता सतेंद्र से मिलने के बाद चार दिन का दबा दर्द फूट पड़ा।
पिता से लिपटते ही टूटी बेटी
सीओ सरधना आशुतोष कुमार ने रूबी को उसके पिता, भाई और बहन से मिलवाया। परिवार को देखते ही रूबी खुद को संभाल नहीं पाई। पिता से लिपटकर देर तक रोती रही। पिता ने कांपती आवाज में बस यही पूछा – “तुझे कोई नुकसान तो नहीं पहुंचाया?”
फरसे और तमंचे के बीच संघर्ष
रूबी ने घटनाक्रम कोर्ट और पुलिस को सिलसिलेवार बताया। वह दो सहेलियों के साथ गन्ना छीलने पिता के पास जा रही थी, तभी पारस सोम हाथ में फरसा लेकर अचानक सामने आया। सहेलियां डरकर भाग गईं। रूबी का हाथ पकड़कर उसने जबरन खींचा। मां सुनीता ने विरोध किया तो पारस ने फरसे से वार कर दिया। रूबी हाथ जोड़कर उसे रोकती रही, लेकिन वह नहीं रुका। मां जमीन पर गिर गई और पारस रूबी को घसीटते हुए गन्ने के खेत में ले गया।
डेढ़ घंटे की डरावनी कैद
रूबी किसी तरह छूटकर भागी, लेकिन पारस ने तमंचा दिखाकर धमकी दी – “जैसे तेरी मां को मारा है, वैसे तेरे पिता और भाई को भी मार दूंगा।”
करीब डेढ़ घंटे तक रूबी को ठेके के पीछे गन्ने के खेत में बंधक रखा गया। डर और सदमे में वह उसके साथ गंगनहर पटरी तक गई, जहां पारस ने ट्रक रुकवाया और चादर में छिपाकर तमंचा बार-बार दिखाया।
स्टेशन और ट्रेन के रास्ते पर भय
दिल्ली से वापस ट्रेन द्वारा खतौली लाए गए रूबी को हरिद्वार ले जाने की योजना भी बनाई जा रही थी। पुलिस तक सूचना पहुंची और दोनों को पकड़ा गया। रूबी ने कोर्ट में बिना डरे पूरी सच्चाई बताई – “मर जाऊंगी, पर झूठ नहीं बोलूंगी।”
फरसे का चित्र बनाकर दी हत्या की जानकारी
सीओ आशुतोष कुमार के पूछने पर रूबी ने फरसे का चित्र बनाकर हत्या का तरीका बताया। उसने स्पष्ट किया कि पारस अकेला था और पैदल तथा ट्रक के जरिए अपहरण किया गया, कार का इस्तेमाल नहीं हुआ।
पुलिस की जांच जारी
रूबी के बयान के बाद हिरासत में लिए गए सुनील की भूमिका पर पुलिस जांच कर रही है। अपराध साबित न होने पर उसे छोड़े जाने की संभावना है।