Saturday, January 10

‘20 साल तक फेल रहा मनरेगा’, जौनपुर में बोले प्रभारी मंत्री एके शर्मा कहा— यूपीए सरकार में सिर्फ कागजों पर चलता था काम, मोदी सरकार ने किए क्रांतिकारी सुधार

जौनपुर।
उत्तर प्रदेश सरकार में प्रभारी मंत्री एके शर्मा ने शनिवार को जौनपुर दौरे के दौरान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2005 में लागू हुआ मनरेगा अपने उद्देश्य में पूरी तरह विफल रहा और 20 से 21 वर्षों में इससे कोई ठोस विकास कार्य नहीं हो सका।

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मंत्री शर्मा ने कहा कि इतने वर्षों में तो कोई ढंग की सड़क बनी और ही टिकाऊ तालाबों का निर्माण हो पाया। मनरेगा का लाभ ग्रामीण गरीबों तक नहीं पहुंच सका। जब उनसे यह सवाल किया गया कि वर्ष 2014 से अब तक एनडीए की सरकार सत्ता में है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान यूपीए सरकार के कार्यकाल को लेकर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मनरेगा व्यवस्था में व्यापक और पारदर्शी सुधार किए गए हैं

ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम

प्रभारी मंत्री ने कहा कि विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम’ ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल योजनाओं के नाम बदलने में विश्वास नहीं रखती, बल्कि जमीनी बदलाव लाने पर जोर देती है। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें तभी अच्छा लगता है जब योजनाओं के नाम नेहरू और गांधी परिवार से जुड़े हों।

रोजगार गारंटी 125 दिन, पलायन पर लगेगा ब्रेक

मंत्री एके शर्मा ने बताया कि नए अधिनियम के तहत ग्रामीण रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। यह फैसला ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने, बेरोजगारी कम करने और गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोकने में सहायक साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय ग्रामीण समाज के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भ्रष्टाचार पर प्रहार, मजदूरों को मिलेगा वास्तविक लाभ

मंत्री ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के समय मनरेगा में भारी भ्रष्टाचार था। मजदूरों की गिनती केवल कागजों पर होती थी और वास्तविक मजदूरों को पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए ठोस सुधार किए, जिससे लाभ सीधे मजदूरों तक पहुंच रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि पुराने अधिनियम में कई शर्तों के कारण बेरोजगारी भत्ता मिलना मुश्किल था, जबकि नए प्रावधानों में अनावश्यक शर्तें हटाई गई हैं। अब यदि किसी श्रमिक को समय पर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो बेरोजगारी भत्ता स्वतः देय होगा

 

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