
बीजिंग/नई दिल्ली।
दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत और चीन के बीच भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा अब समुद्र तक साफ दिखाई देने लगी है। भारतीय नौसेना और चीनी नौसेना की बढ़ती मौजूदगी ने इस क्षेत्र को शक्ति प्रदर्शन का नया केंद्र बना दिया है। दोनों देश अपनी-अपनी नौसैनिक ताकत के जरिए न केवल रणनीतिक संतुलन साधना चाहते हैं, बल्कि क्षेत्रीय देशों के साथ रक्षा और कूटनीतिक संबंध भी मजबूत करने में जुटे हैं।
भारतीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारतीय नौसेना के फर्स्ट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन के चार जहाजों को एक लंबे प्रशिक्षण मिशन पर भेजा गया है। इस मिशन के तहत ये जहाज सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड का दौरा करेंगे। इसका उद्देश्य अधिकारी प्रशिक्षुओं को व्यापक परिचालन अनुभव के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय और सांस्कृतिक समझ प्रदान करना है।
दक्षिण-पूर्व एशिया में चीनी युद्धपोतों की मौजूदगी
भारत के समानांतर चीन भी दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी सैन्य उपस्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है। बीजिंग ने 15 नवंबर से 22 दिसंबर के बीच गहरे समुद्र में प्रशिक्षण अभ्यास के लिए अपने तीन युद्धपोत तैनात किए थे। इन युद्धपोतों ने वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया का दौरा किया और स्थानीय नौसेनाओं के साथ अनुभव साझा किया। हालांकि इसे औपचारिक युद्धाभ्यास नहीं बताया गया, लेकिन इसे चीन की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
क्यों अहम है दक्षिण-पूर्व एशिया?
रणनीतिक दृष्टि से दक्षिण-पूर्व एशिया, पूर्व में चीन और पश्चिम में भारत के बीच स्थित एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्र है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह इलाका समुद्री व्यापार मार्गों, ऊर्जा आपूर्ति और सैन्य आवाजाही के लिहाज से निर्णायक भूमिका निभाता है।
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ‘फर्स्ट आइलैंड चेन’ को अपनी सुरक्षा रणनीति का केंद्र मानता है, जो चीन और अधिकांश दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की समुद्री सीमाओं से जुड़ी हुई है।
एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत भारत की सक्रियता
हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती पकड़ को संतुलित करने के लिए भारत अपनी ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया में कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियों को तेज कर रहा है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से भारत के प्रभाव क्षेत्र में रहा है, लेकिन पिछले एक दशक में चीन ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की है। ऐसे में भारत अब फिर से अपनी भूमिका को सशक्त करने और शक्ति संतुलन बनाए रखने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
भारतीय नौसेना का फर्स्ट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन
भारतीय नौसेना के फर्स्ट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन में INS तीर, INS शार्दुल, INS सुजाता और ICGS सारथी शामिल हैं। इस मिशन में भारतीय सेना और वायु सेना के जवान भी शामिल हैं, जिससे तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और सामंजस्य को और मजबूत किया जा सके। इसके अलावा, छह मित्र देशों के अधिकारी प्रशिक्षु भी इस अभियान का हिस्सा हैं।
निष्कर्ष
दक्षिण-पूर्व एशिया अब केवल आर्थिक या कूटनीतिक नहीं, बल्कि भारत-चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया समुद्री रणक्षेत्र बनता जा रहा है। आने वाले समय में इस क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियों का बढ़ना, एशिया की सुरक्षा और शक्ति संतुलन को नई दिशा दे सकता है।