Wednesday, June 17

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हम अमेरिकन नहीं बनना चाहते ट्रंप के बयान के खिलाफ ग्रीनलैंड के सभी राजनीतिक दल एकजुट, दिया कड़ा और स्पष्ट संदेश

अमेरिका की ओर से रणनीतिक रूप से अहम और खनिज-समृद्ध ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर दिए जा रहे बयानों के खिलाफ वहां तीखा विरोध शुरू हो गया है। ग्रीनलैंड की सरकार के सख्त रुख के बाद अब द्वीप के सभी प्रमुख राजनीतिक दल एकजुट हो गए हैं और उन्होंने अमेरिका की किसी भी तरह की जबरदस्ती को साफ शब्दों में खारिज कर दिया है।

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ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन और चार अन्य पार्टी नेताओं ने शुक्रवार रात एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि ग्रीनलैंड का भविष्य तय करने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ ग्रीनलैंड के लोगों के पास है। नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा,

“हम न तो अमेरिकी बनना चाहते हैं और न ही डेनिश। हम ग्रीनलैंडवासी हैं और वही बने रहना चाहते हैं। हमें अपने भविष्य का फैसला खुद करने दिया जाए।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों की ओर से ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने को लेकर लगातार बयान सामने आ रहे हैं। इन बयानों से डेनमार्क और ग्रीनलैंड—दोनों में चिंता गहराती जा रही है।

“हम पर कोई दबाव न बनाया जाए”

संयुक्त बयान में ग्रीनलैंड के नेताओं ने कहा कि किसी भी देश को ग्रीनलैंड के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य से जुड़ा हर निर्णय अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत और ग्रीनलैंड के लोगों से संवाद के जरिए ही होगा।
बयान में यह भी कहा गया कि यह प्रक्रिया बिना किसी दबाव, जल्दबाजी, देरी या बाहरी हस्तक्षेप के पूरी की जाएगी।

इस बयान पर प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन के साथ-साथ पेले ब्रोबर्ग, म्यूटे बी. एगेडे, एलेका हैमंड और अक्कालु सी. जेरिमिसेन ने हस्ताक्षर किए हैं।

ग्रीनलैंड क्यों है इतना अहम

करीब 57 हजार की आबादी वाला ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार हैं, जो वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से अहम हैं।
ग्रीनलैंड डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। यहां अपनी सरकार और प्रधानमंत्री हैं, लेकिन अपनी सेना नहीं है। इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी डेनमार्क की सेना संभालती है।

अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड को किसी भी सूरत में अपने नियंत्रण में लेने की बातों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। अब ग्रीनलैंड के सभी राजनीतिक दलों की एकजुटता ने साफ कर दिया है कि द्वीप की जनता अपने भविष्य को लेकर किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

 

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