
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक (I-PAC) पर ईडी की छापेमारी के विवाद ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। राज्य सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट में केविएट दायर करते हुए अनुरोध किया है कि इस मामले में कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसे सुनवाई का मौका दिया जाए।
क्या है केविएट?
केविएट एक कानूनी नोटिस है, जो किसी पक्ष द्वारा दायर किया जाता है ताकि किसी केस में कोई आदेश या निर्णय दिए जाने से पहले उसे अपनी दलील रखने का अवसर मिल सके।
क्या हुआ मामला?
गुरुवार को ईडी ने करोड़ों रुपये के कथित कोयला चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कोलकाता में आई-पैक और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की।
ईडी की कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी छापेमारी स्थल पर पहुंचीं। एजेंसी का दावा है कि ममता बनर्जी ने पुलिस की मदद से कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस अपने कब्जे में ले लिए। वहीं, मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ईडी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की।
हाईकोर्ट और आगे की कार्रवाई
ईडी ने इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया और ममता बनर्जी के खिलाफ सीबीआई से जांच कराने का अनुरोध किया। इस बीच, राज्य सरकार ने केविएट दायर कर जोर देकर कहा कि किसी भी निर्णय या आदेश से पहले उसका पक्ष सुना जाना आवश्यक है।
यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर गहराता दिख रहा है और अब इसे हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए पेश किया जाएगा।