Tuesday, June 16

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500 साल पहले पहुंची थी एक नाव: ग्रीनलैंड कैसे बना डेनमार्क का हिस्सा, ट्रंप ने क्या कहा

नुक/कोपेनहेगेन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि वे ग्रीनलैंड पर कब्जा करने पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका यह कदम नहीं उठाएगा तो चीन और रूस इसे ले सकते हैं। उन्होंने ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता को चुनौती देते हुए कहा, “500 साल पहले उनकी एक नाव वहां पहुंची थी, इसका मतलब यह नहीं कि इस जमीन पर उनका मालिकाना हक है।”

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इतिहास में देखें तो ग्रीनलैंड में पहली नॉर्डिक उपस्थिति 10वीं शताब्दी के अंत में हुई थी, जब वाइकिंग एरिक द रेड ने इसे बसाया। नॉर्स लोग सदियों तक दक्षिणी ग्रीनलैंड में रहे, लेकिन 1500 ईस्वी के आसपास उनकी आबादी गायब हो गई।

करीब 200 साल बाद, 1721 में नॉर्वे के पादरी हैंस एगेडे डेनमार्क और नार्वे की मदद से ग्रीनलैंड पहुंचे। उन्होंने यहां रहने वाले इनुइट लोगों को ईसाई धर्म से जोड़ा। इसी यात्रा से ग्रीनलैंड में औपनिवेशिक काल की शुरुआत हुई।

1814 में डेनमार्क और नार्वे अलग हो गए और ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन रह गया। 1916 में अमेरिका ने डेनमार्क के अधिकार की पुष्टि की और बदले में डेनिश वेस्टइंडी खरीदी। 1933 में नार्वे के दावे को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने खारिज किया।

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद उपनिवेशवाद खत्म होने के दबाव के चलते 1953 में ग्रीनलैंड को डेनमार्क में शामिल किया गया। इसे डेनमार्क की संसद में दो सीटें मिलीं। 1979 में होमरूल लागू हुआ और 2009 में कानून पारित हुआ, जिसने तय किया कि ग्रीनलैंड की आजादी का फैसला सिर्फ वहां के लोगों के हाथ में होगा।

ग्रीनलैंड का इतिहास और इसकी जटिल स्थिति आज भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है।

 

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