
नई दिल्ली, 10 जनवरी 2026: देश के लगभग आधे शहर लगातार पांच साल से अधिक समय तक वायु प्रदूषण के उच्च स्तर को झेल रहे हैं। हाल ही में सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि देश के 4041 शहरों में से 1787 शहरों में 2019 से 2024 तक हर साल पीएम 2.5 मानक से अधिक प्रदूषण दर्ज किया गया। इस आंकड़े में कोविड वर्ष 2020 शामिल नहीं है।
हालांकि, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) में केवल 130 शहर शामिल हैं, यानी प्रदूषित शहरों का सिर्फ 4 प्रतिशत। इन 1787 प्रदूषित शहरों में से केवल 67 शहर ही NCAP के तहत आते हैं।
CREA का विश्लेषण और मुख्य बातें:
- देश के 44 प्रतिशत शहर लंबे समय से सालभर पीएम 2.5 प्रदूषण से प्रभावित हैं।
- प्रदूषण मुख्य रूप से परिवहन, उद्योग और पावर प्लांट से होने वाले उत्सर्जन के कारण है।
- 130 NCAP शहरों में से 28 शहरों में कॉन्टिन्यूअस एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (CAQMS) नहीं हैं।
- जिन 102 शहरों में स्टेशन हैं, उनमें 100 शहरों में पीएम 10 डेटा कवरेज 80% या उससे अधिक दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों की राय:
CREA के इंडिया एनालिस्ट मनोज कुमार के अनुसार, भारत के लिए जरूरी है कि NCAP का दायरा बढ़ाया जाए और PM 2.5 तथा गैस प्रदूषण (SO2, NO2) पर अधिक ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि केवल पीएम 10 के आंकड़ों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।
NCAP फंड और उपयोग:
- अब तक NCAP को 13.41 हजार करोड़ रुपये मिले हैं।
- इनमें से 9.92 हजार करोड़ (74%) खर्च किए जा चुके हैं।
- खर्च का 68% हिस्सा सड़क धूल नियंत्रण पर और 14% बायोमास जलाने को रोकने पर हुआ।
CREA की रिपोर्ट से साफ है कि वायु प्रदूषण समस्या मौसमी नहीं बल्कि सालभर बनी रहती है, और इसके मुकाबले के लिए NCAP का दायरा बढ़ाना और मॉनिटरिंग तंत्र मजबूत करना आवश्यक है।