
मुंबई/पुणे। महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद एनसीपी में अनिश्चितता के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। 28 जनवरी को बारामती में हुए प्लेन क्रैश में अजित पवार के निधन के बाद 30 जनवरी तक राजकीय शोक घोषित किया गया था। 31 जनवरी को ही उनके समर्थकों ने एनसीपी विधायक दल की बैठक कर अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम के लिए नेता चुना और उनका शपथ ग्रहण करवा दिया।
इतनी जल्दबाजी के पीछे रणनीति
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार इतनी तेजी से लिए गए फैसलों के पीछे एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल की रणनीति रही। शरद पवार की बारामती में बैठक में अजित पवार के परिवार के सदस्य नहीं पहुंचे थे, और उन्हें मुंबई में हो रहे घटनाक्रम की जानकारी नहीं थी।
शरद पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि 12 फरवरी को एनसीपी के दोनों गुटों का विलय होना था, लेकिन वर्तमान में विलय अधर में लटक गया है। उन्होंने कहा कि मुंबई में जो फैसले लिए जा रहे हैं, उसमें उनसे सलाह नहीं ली गई।
शरद गुट का इमोशनल कार्ड
अजित पवार के निधन के बाद शरद गुट ने पार्टी के विलय का राग छेड़ दिया। एकनाथ खडसे, जयंत पाटिल, रोहित पवार और हर्षवर्धन पाटिल समेत कई नेताओं ने इमोशनल कार्ड खेलते हुए विलय की वकालत की। शरद पवार गुट ने इसे अजित पवार की आखिरी इच्छा के रूप में पेश किया। इसके बाद प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और सुनील तटकरे ने सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाने के लिए विधायक दल की बैठक बुलाकर रणनीति को अंजाम दिया।
एनसीपी में अजित समर्थकों की स्थिति मजबूत
सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम बनने के बाद अजित पवार के गुट की ताकत तीन मोर्चों पर स्थापित हो गई है—
- पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल,
- प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे,
- विधायक दल का नेतृत्व सुनेत्रा पवार।
इसके साथ ही पार्थ पवार को राज्यसभा में भेजने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में भी अजित गुट की मौजूदगी दर्ज होगी। एनसीपी में अजित समर्थक अब 41 विधायक और एक सांसद के साथ मजबूत स्थिति में हैं, और महाराष्ट्र सरकार में एनसीपी कोटे के 9 मंत्री उनकी पकड़ में हैं।