Wednesday, June 17

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कपिल पाटिल या निशांत कुमार? नीतीश के ‘New JDU’ का खाका खिंच रहा बड़ा शानदार

 

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पटना (ऋषिकेश नारायण सिंह/रमाकांत चंदन) – बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) का सांगठनिक ढांचा नए सिरे से आकार लेने लगा है। इस बीच राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि JDU का अगला कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा। 2025 से 2028 के लिए सदस्यता अभियान के दौरान संगठन में बदलाव और नेतृत्व पदों पर फेरबदल के संकेत मिलने लगे हैं।

 

कपिल पाटिल क्यों चर्चा में हैं

महाराष्ट्र के कपिल पाटिल का नाम जेडीयू के नए कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में चर्चा में है। यह चर्चा और तेज हुई जब हाल ही में पाटिल ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। लंबे समय तक जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव रहे कपिल पाटिल ने गुजरात और गोवा में पार्टी के प्रभारी के रूप में भी कार्य किया है। वे महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य रहे हैं और लगातार तीन बार (2006, 2012, 2018) चुनाव जीत चुके हैं।

 

नीतीश कुमार कपिल पाटिल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के पीछे राजनीतिक रणनीति की भी चर्चा है। महाराष्ट्र से होने के कारण बिहार में जेडीयू के नेताओं के बीच कोई विरोध नहीं होगा। इससे पार्टी के अंदर बढ़ती मठाधीशी और किसी तरह के बीजेपी में विलय की संभावनाओं पर रोक लगेगी। कपिल पाटिल वैसे भी बीजेपी के कट्टर विरोधी हैं, इसलिए महागठबंधन छोड़कर NDA के साथ सरकार बनाने के बाद भी उनका राजनीतिक नजरिया नीतीश के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।

 

निशांत कुमार की भी चर्चा

इसके अलावा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार का नाम भी कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चल रही चर्चा में है। सामाजिक कार्यों में उनकी बढ़ती भागीदारी और सरकार के कामों को उजागर करने के कारण माना जा रहा है कि उनके राजनीतिक प्रवेश की संभावना बढ़ रही है। हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि निशांत कुमार को पहले राष्ट्रीय महासचिव बनाकर पूरे बिहार का दौरा कराएंगे, और भविष्य में राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का रास्ता साफ किया जा सकता है।

 

संजय झा इस रेस से बाहर

वहीं, जेडीयू के वरिष्ठ नेता संजय झा इस रेस से बाहर माने जा रहे हैं। उनकी बीजेपी समर्थक छवि और 2025 विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के साथ तालमेल न बैठने के कारण उनका ग्राफ पार्टी में गिरा है।

 

राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार की यह रणनीति ‘New JDU’ को मजबूती देने और पार्टी के सांगठनिक ढांचे को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में अहम साबित होगी।

 

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