
नई दिल्ली, 10 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (JDA) और पूर्व राजघराने की सदस्य एवं पूर्व डिप्टी सीएम दीया कुमारी के परिवार के बीच 400 करोड़ रुपये की जमीन के विवाद में राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है। हाई कोर्ट ने पहले निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा था, जो राजघराने के पक्ष में था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई फिर से शुरू करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी:
जस्टिस जे बी पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट ने तकनीकी आधार पर JDA की अपील पर विचार करने से इनकार करके सही काम नहीं किया। कोर्ट ने हाई कोर्ट को चार हफ्तों के अंदर JDA की पहली अपील पर मेरिट के आधार पर फैसला लेने और अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि:
- विवाद जयपुर के शहरी इलाके में फैली जमीन से जुड़ा है, जिसे पहले ‘हथरोई गांव’ के नाम से जाना जाता था।
- आज इस इलाके में कीमती जमीन, स्कूल, अस्पताल और अन्य सुविधाएं मौजूद हैं।
- JDA का दावा है कि यह जमीन ‘सिवाई चक’ यानी बिना खेती वाली सरकारी जमीन के रूप में दर्ज थी।
इतिहास और कानूनी लड़ाई:
- 1990 के दशक में JDA ने इस जमीन पर कब्जा किया और शाही परिवार के दावे को चुनौती दी। शाही परिवार का कहना था कि यह जमीन 1949 की संधि के तहत उनकी निजी संपत्ति थी, जो जयपुर के भारतीय संघ में विलय से जुड़ी थी।
- JDA का जोर है कि इस जमीन का नाम कभी भी संधि की सूची में नहीं था और 1993 से 1995 के बीच इसे मुआवजा देकर कानूनी तौर पर अधिग्रहित किया गया।
- 2005 में शाही परिवार ने दीवानी मुकदमा दायर किया। निचली अदालत ने 24 नवंबर 2011 को उनके पक्ष में फैसला सुनाया और JDA को जमीन में दखल देने से रोका।
- JDA ने 2012 में पहली अपील दायर की, जिसे नवंबर 2023 में खारिज कर दिया गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इसे फिर से बहाल किया गया।
- पिछले साल 15 सितंबर को हाई कोर्ट ने विवाद में दखल देने से मना कर दिया था। इसके बाद JDA ने 10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
अगला कदम:
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब हाई कोर्ट मेरिट के आधार पर JDA की अपील पर फैसला करेगी। इससे यह तय होगा कि जयपुर की इस कीमती जमीन का मालिकाना हक किसके पास है।