Friday, June 5

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बिहार के ‘कलयुग के दधीचि’: पेंशन से गरीब बच्चों की शिक्षा पर खर्च करते हैं पैसे

 

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बिहार के सीतामढ़ी जिले में एक रिटायर शिक्षक हैं, जिनका जीवन समाज की सेवा और बच्चों की शिक्षा के प्रति समर्पित है। उनका नाम है डॉ. नवल किशोर प्रसाद यादव, जिन्हें लोग “कलयुग के महर्षि दधीचि” के रूप में जानते हैं। डॉ. नवल अपनी पेंशन की पूरी राशि गरीब बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं।

 

महर्षि दधीचि की याद दिलाते डॉ. नवल

महर्षि दधीचि का नाम भारतीय पुराणों में उनकी दानवीरता और निस्वार्थ सेवा के लिए प्रसिद्ध है। महर्षि दधीचि ने मानव कल्याण के लिए अपनी अस्थियों का दान किया था, जिनसे इंद्र ने वज्र तैयार कर वृत्रासुर का वध किया। सीतामढ़ी में डॉ. नवल का काम कुछ वैसा ही है—वे अपनी पेंशन के पैसे गरीब बच्चों की शिक्षा पर खर्च कर समाज को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

 

शिक्षा के प्रति समर्पण

डॉ. नवल का मानना है कि शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज को दिशा देने का सबसे प्रभावी तरीका है। उन्होंने शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं, लेकिन रिटायर होने के बाद भी उनका समाज सेवा का जज़्बा कम नहीं हुआ। वे सीतामढ़ी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं।

 

वे बच्चों के लिए किताबें, कॉपियां और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी मुहैया कराते हैं, ताकि किसी भी बच्चे की पढ़ाई पैसे की कमी के कारण बाधित न हो। डॉ. यादव का उद्देश्य है कि गरीब बच्चों को भी शिक्षा के समान अवसर मिलें।

 

शैक्षिक केंद्र और समाज सेवा

डॉ. यादव ने अपने दिवंगत बेटे शशिरंजन की याद में ‘शशिरंजन शिक्षा केंद्र’ की स्थापना की। यह केंद्र शिक्षा के माध्यम से समाज को सुधारने के उनके मिशन का प्रतीक बन गया है। इस केंद्र के तहत वे बच्चों के लिए जिला स्तरीय कुशाग्र बुद्धि परीक्षा का आयोजन करते हैं और चयनित विद्यार्थियों को आर्थिक मदद प्रदान करते हैं।

 

इसके साथ ही, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को नि:शुल्क मार्गदर्शन और सफलता के टिप्स भी देते हैं। डॉ. यादव के मार्गदर्शन में कई छात्र आज बैंक, सेना, मेडिकल और डाक विभाग जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं में कार्यरत हैं।

 

शिक्षा के प्रति यह समर्पण प्रेरणा का स्रोत

सीतामढ़ी जिले के इस रिटायर शिक्षक का जीवन उन लोगों के लिए एक प्रेरणा है जो समाज सेवा और शिक्षा को प्राथमिकता देते हैं। डॉ. नवल के काम से यह सिद्ध होता है कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की दिशा बदलना भी है।

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