Tuesday, June 16

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I-PAC रेड पर सियासी घमासान, अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से कुछ महीनों पहले राजनीतिक सियासी तापमान बढ़ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को राजनीतिक सलाहकार फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) के साल्ट लेक स्थित कार्यालय और इसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट वाले घर पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई है।

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ममता बनर्जी का तीखा हमला

ईडी की कार्रवाई की खबर मिलते ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के आंतरिक दस्तावेज, हार्ड डिस्क, उम्मीदवारों की सूची और चुनावी रणनीति जब्त करने का प्रयास कर रही थी।

 

ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, “जो गृह मंत्री देश की रक्षा नहीं कर सकता, वह मेरी पार्टी के सारे डॉक्यूमेंट्स लेकर जा रहा है। अगर मैं भाजपा के पार्टी ऑफिस पर छापा मारूं तो क्या होगा?”

 

ममता बनर्जी ने प्रतीक जैन के घर से एक हरी फाइल और हार्ड डिस्क लेकर बाहर निकला और दावा किया कि पार्टी के दस्तावेज सुरक्षित हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया और पूरे राज्य में टीएमसी की ओर से प्रदर्शन का ऐलान किया।

 

अखिलेश यादव का तंज

सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी ईडी की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा, “भाजपा बुरी तरह बंगाल हार रही है। पहला प्रमाण!” इससे साफ संदेश मिला कि विपक्ष इस मामले को भाजपा पर राजनीतिक दबाव के रूप में देख रहा है।

 

आई-पैक और प्रतीक जैन की भूमिका

आई-पैक की स्थापना 2014 में प्रशांत किशोर ने की थी। फर्म ने 2019 लोकसभा चुनावों के बाद टीएमसी और बंगाल सरकार के साथ काम किया। प्रतीक जैन आई-पैक के को-फाउंडर और टीएमसी के आईटी सेल प्रमुख हैं। फर्म ने 2021 विधानसभा चुनाव में टीएमसी को भारी बहुमत दिलाने और 2024 लोकसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

ईडी सूत्रों का कहना है कि छापेमारी कोयला तस्करी मामले से जुड़ी है और इसमें हवाला लेन-देन और नकद सौदों के सबूत मिले हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई सबूतों पर आधारित है और इसका चुनाव से कोई संबंध नहीं है।

 

राजनीतिक माहौल गर्म

यह छापेमारी ऐसे समय हुई है जब राज्य में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। टीएमसी ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है। वहीं, विपक्ष ने इसे भाजपा की हार के प्रमाण के रूप में पेश किया है, जिससे सियासी घमासान और बढ़ गया है।

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