Thursday, June 25

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तेजी से निपट रहे हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम, लेकिन औसत राशि में आई गिरावट: IRDAI रिपोर्ट

हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में क्लेम सेटलमेंट को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बीमा नियामक IRDAI (इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों ने पहले के मुकाबले ज्यादा तेजी से क्लेम निपटाए हैं और क्लेम खारिज होने के मामलों में भी उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि, प्रति क्लेम मिलने वाली औसत राशि में हल्की गिरावट दर्ज की गई है।

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रिकॉर्ड स्तर पर क्लेम सेटलमेंट
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में दर्ज कुल हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम में से करीब 87% (लगभग 3.26 करोड़ क्लेम) का निपटारा किया गया। पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 83% था। वहीं, क्लेम रिजेक्ट होने की दर 11% से घटकर 8% पर आ गई है। मार्च 2025 के अंत तक पेंडिंग क्लेम भी 6% से घटकर लगभग 5% रह गए हैं।

कुल भुगतान बढ़ा, औसत रकम घटी
क्लेम भुगतान की कुल राशि में इजाफा हुआ है। कंपनियों ने वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 94,248 करोड़ रुपये के क्लेम का भुगतान किया, जो पिछले साल के 83,493 करोड़ रुपये से अधिक है। हालांकि, प्रति क्लेम मिलने वाली औसत राशि 31,086 रुपये से घटकर 28,910 रुपये रह गई।

कैशलेस इलाज का बढ़ता चलन
हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम में कैशलेस सुविधा का दबदबा बना हुआ है। वर्ष 2024-25 में कुल क्लेम राशि का करीब 66.35% भुगतान कैशलेस माध्यम से किया गया, जो पिछले साल के लगभग बराबर है। वहीं, रिइम्बर्समेंट क्लेम का हिस्सा 31.35% से घटकर 29.34% रह गया। करीब 3% क्लेम ऐसे रहे, जिनमें कैशलेस और रिइम्बर्समेंट दोनों विकल्पों का इस्तेमाल किया गया।

सुधार के पीछे नियामक सख्ती
विशेषज्ञों के मुताबिक, क्लेम सेटलमेंट में यह सुधार IRDAI की सख्ती और नए नियमों का नतीजा है। नए दिशा-निर्देशों के तहत अस्पताल में भर्ती के लिए प्रीऑथराइजेशन एक घंटे के भीतर और डिस्चार्ज के समय फाइनल मंजूरी तीन घंटे के भीतर देना अनिवार्य किया गया है। तय समय में मंजूरी नहीं मिलने पर बीमा कंपनियों को जुर्माना अपने शेयरहोल्डर्स के फंड से देना होगा। इसके अलावा, किसी भी क्लेम को खारिज करने से पहले उसे रिव्यू कमेटी की मंजूरी लेना अब जरूरी कर दिया गया है।

कुल मिलाकर, हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में पारदर्शिता और क्लेम सेटलमेंट की रफ्तार तो बढ़ी है, लेकिन औसत क्लेम राशि में आई गिरावट उपभोक्ताओं और कंपनियों—दोनों के लिए एक अहम संकेत मानी जा रही है।

 

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