Tuesday, January 6

बालिग पत्नी को नाबालिग बताकर युवक पर POCSO मामला, जज और वकील को कारण बताओ नोटिस रिपोर्टेड बाय: मोनिका पांडे | एडिटेड बाय: आकाश सिकरवार

 

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जबलपुर: मध्य प्रदेश की हाईकोर्ट ने जबलपुर के एक विशेष न्यायाधीश और लोक अभियोजक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मामला एक ऐसे युवक का है, जिसे POCSO एक्ट के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जबकि युवती की उम्र बालिग थी। हाईकोर्ट ने इस निर्णय को अन्यायपूर्ण मानते हुए आरोपी को बरी कर दिया।

 

 

 

 

पनागर थाना क्षेत्र के रवि कोल ने माढ़ोताल थाना क्षेत्र की एक युवती से प्रेम विवाह किया। युवती की मां ने उसे नाबालिग बताकर पुलिस में अपहरण का मामला दर्ज कराया। पुलिस ने युवती को बरामद कर रवि कोल के खिलाफ अपहरण और POCSO सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया।

 

 

 

बोन टेस्ट में सामने आई उम्र

 

युवती ने अदालत में स्पष्ट किया कि उसने अपनी मर्जी से मंदिर में विवाह किया। उसकी उम्र का पता लगाने के लिए बोन टेस्ट कराया गया। रिपोर्ट में पता चला कि युवती की उम्र 18 साल से अधिक थी। इसके बावजूद विशेष न्यायालय ने नवंबर 2023 में रवि कोल को POCSO एक्ट के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

 

 

 

हाईकोर्ट ने पाया अन्याय

 

हाईकोर्ट की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष ने एक्स-रे रिपोर्ट पेश की थी, लेकिन लोक अभियोजक ने इसे सही तरीके से पेश नहीं किया और विशेष न्यायाधीश ने भी दस्तावेजों पर ध्यान नहीं दिया। न्यायाधीश ने धारा 311 के तहत अधिकार का प्रयोग नहीं किया और एक्स-रे रिपोर्ट पर और सबूत नहीं मांगे।

 

हाईकोर्ट ने कहा कि रवि कोल के साथ अन्याय हुआ और उसे बेवजह जेल में रखा गया। इसके बाद कोर्ट ने सजा को रद्द करते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।

 

 

 

यह मामला न्यायपालिका और अभियोजन पक्ष के कार्यों में लापरवाही और सुनवाई में त्रुटियों को उजागर करता है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को कारण बताने के लिए नोटिस जारी कर सख्त संदेश दिया है।

 

 

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