
गुवाहाटी (असम): पूर्वोत्तर के राज्य असम में कांग्रेस ने सत्ता की वापसी के लिए बड़ा दांव खेला है। पार्टी ने प्रियंका गांधी को असम के विधानसभा चुनाव मोर्चे की जिम्मेदारी सौंपी है। यह पहला मौका है जब किसी राज्य की चुनावी रणनीति की कमान सीधे उनके हाथों में होगी।
केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद ऐसा पहली बार होगा जब बीजेपी के रणनीतिकार और गृह मंत्री अमित शाह का सीधे मुकाबला प्रियंका गांधी से होगा। बीजेपी की ओर से मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा चुनाव मैदान में उतरेंगे, जबकि कांग्रेस ने गौरव गोगोई को उम्मीदवार बनाया है।
प्रियंका गांधी की नियुक्ति के साथ ही कांग्रेस ने असम को राष्ट्रीय राजनीति में फिर से चर्चा का केंद्र बना दिया है। उन्होंने स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्षता संभाली है, जिसमें महाराष्ट्र के यशोमति ठाकुर, इमरान मसूद, सप्तगिरी शंकर उलाका और डॉ. सिरिवेला प्रसाद भी शामिल हैं।
पहले मुकाबले का हिसाब
असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं, बहुमत के लिए 64 सीटें जरूरी हैं। पिछली विधानसभा में सीटों का बंटवारा इस प्रकार था:
| चुनाव वर्ष | बीजेपी | कांग्रेस | AIUDF | अन्य/निर्दलीय |
| ———- | —————— | ——– | —– | ————- |
| 2021 | 60+15 (AGP & UPPL) | 29 | 16 | 1 |
| 2016 | 60+28 (AGPBPF) | 26 | 13 | 1 |
| 2011 | 5 | 78 | 8 | 30 |
असम में प्रियंका गांधी और अमित शाह के आमने-सामने आने से चुनावी उत्सुकता बढ़ गई है। अमित शाह की रणनीति हमेशा हाईवोल्टेज रही है—दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार में उनकी योजनाओं का असर साफ दिखा। अब सवाल यह है कि प्रियंका गांधी असम में कितनी चुनौती पेश कर पाएंगी।
कांग्रेस का मानना है कि प्रियंका गांधी के नेतृत्व में पार्टी संगठन को मजबूत किया जा सकता है और बीजेपी के खिलाफ मजबूती से चुनाव लड़ा जा सकता है।