
2026 भारत के लिए विदेश नीति के लिहाज से निर्णायक साल साबित हो सकता है। पूरे वर्ष भारत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सम्मेलनों में अपनी ताकत और नेतृत्व दिखाएगा। ग्लोबल साउथ में भारत को नेतृत्व करने का अवसर भी मिलेगा।
गणतंत्र दिवस से शुरुआत
भारत-यूरोपियन यूनियन शिखर सम्मेलन गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में होगा, जिसमें कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों को गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस सम्मेलन में मुक्त व्यापार समझौते पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन
फरवरी में AI इम्पैक्ट समिट, जहां भारत ग्लोबल साउथ के लिए अपना एजेंडा तय करेगा।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS summit) की मेजबानी भी इसी वर्ष भारत करेगा।
इसी साल भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन का आयोजन भी संभावित है।
जियो-पॉलिटिक्स में भारत की बढ़ती भूमिका
विशेषज्ञों का कहना है कि AI समिट ग्लोबल साउथ के लिए भारत को नेतृत्व की भूमिका देने का मौका देगा, और चीन और कुछ पश्चिमी देशों पर इसका प्रभाव पड़ेगा। ब्रिक्स समिट में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल होने की संभावना है।
अमेरिका और क्वाड शिखर सम्मेलन
भारत इस साल क्वाड शिखर सम्मेलन आयोजित करने की योजना बना रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत आने की संभावना भी है। यह मौजूदा जियो-पॉलिटिक्स में बड़ा बदलाव ला सकता है। साथ ही अमेरिका जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
द्विपक्षीय समिट और निवेश अवसर
जापान के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन, जिसमें भारत में निवेश और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी में साझेदारी पर जोर होगा।
नॉर्वे में इंडिया-नॉर्डिक समिट, आर्थिक भागीदारी पर फोकस।
2026 में भारत में आने वाले वैश्विक नेताओं में जर्मनी के चांसलर और इजराइल के प्रधानमंत्री शामिल हैं।
निष्कर्ष
2026 भारत के लिए विदेश नीति और जियो-पॉलिटिक्स में सक्रियता, नेतृत्व और रणनीतिक प्रभाव दिखाने का वर्ष है। गणतंत्र दिवस से शुरू होने वाले ये सम्मेलन वैश्विक मंच पर भारत की साख और रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेंगे।