Friday, January 2

‘पड़ोसी पहले’ नीति में 2026 का फोकस: भारत बांग्लादेश को भात खिला रहा, सुरक्षा और कूटनीति पर नजर

 

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2026 भारत के लिए पड़ोसी देशों के प्रति नीति (Neighborhood First Policy) के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। इस साल भारत की कूटनीतिक और सुरक्षा निगाहें विशेष रूप से बांग्लादेश पर टिकेंगी, जहां इस्लामी कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत की रणनीति पर फोकस रहेगा।

 

बांग्लादेश पर भारत का विशेष ध्यान

भारत ने बांग्लादेश के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंध बनाए रखने के लिए ‘पड़ोसी पहले’ नीति के तहत मदद बढ़ाई है। हाल ही में भारत ने बांग्लादेश को 50,000 टन अतिरिक्त चावल की आपूर्ति की मंजूरी दी है। इस कदम का उद्देश्य न केवल मानवीय सहायता देना है, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखना भी है।

 

नेपाल और म्यांमार में रणनीति

नेपाल में राजनीतिक स्थिरता की वापसी से भारत को द्विपक्षीय संबंध सुधारने और निवेश बढ़ाने का अवसर मिलेगा। म्यांमार में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार भारत के साथ सहयोग को प्राथमिकता दे सकती है, जिससे आर्थिक अवसर और रणनीतिक साझेदारी बढ़ेंगी।

 

सबसे बड़ी चुनौती: बांग्लादेश का कट्टरपंथ

बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के प्रभाव और अंतरिम सरकार की नीतियों से भारत की सुरक्षा हितों पर दबाव बढ़ सकता है। बीएनपी जैसे राजनीतिक दलों के दृष्टिकोण और भारत विरोधी विचारधारा पर नजर रखना नई दिल्ली के लिए चुनौती होगी।

 

भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति

इस नीति के तहत भारत अपने पड़ोसी देशों (अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका आदि) के साथ शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास को प्राथमिकता देता है। इसका उद्देश्य व्यापार, बुनियादी ढांचा और जन-जन संबंध मजबूत करके क्षेत्रीय सुरक्षा और चीन जैसे बाहरी प्रभावों का मुकाबला करना है।

 

हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत

श्रीलंका, मालदीव, मॉरीशस और सेशेल्स के साथ भारत के संबंध बेहतर बने हुए हैं। अफगानिस्तान में तालिबान 2.0 के नेतृत्व में भारत अपने कूटनीतिक संबंधों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करेगा। केवल पाकिस्तान ही भारत की पड़ोसी नीति में चुनौती बना हुआ है, क्योंकि वह लगातार आतंकवाद को प्रायोजित करता रहा है।

 

निष्कर्ष

2026 में भारत का पड़ोसी देशों के साथ फोकस केवल सहयोग और विकास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीति भी इस नीति का अहम हिस्सा होगी। भारत-बांग्लादेश संबंधों में संतुलन और हिंद महासागर क्षेत्र में प्रभुत्व बनाए रखना नई दिल्ली की प्राथमिकता बनेगी।

 

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