
बीजिंग/नई दिल्ली, 1 जनवरी: 2025 के आखिरी दिनों में चीन ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष में मध्यस्थता का दावा करके एक नई दक्षिण एशिया रणनीति पेश की है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपने बयान में भारत और पाकिस्तान को एक ही तराजू पर तौलते हुए कहा कि बीजिंग को दोनों देशों के बीच शांति स्थापित कराने का अधिकार और जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वांग यी का यह बयान व्यक्तिगत नहीं, बल्कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पॉलिटिकल ब्यूरो और केंद्रीय विदेशी मामलों की नीति के अनुरूप है। इसका मकसद दक्षिण एशिया में चीन को एक मध्यस्थ और क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित करना है।
चीन ने इस कदम के जरिए साफ संकेत दिया है कि वह अब भारत को पाकिस्तान के बराबर मान रहा है और अपनी वैश्विक छवि के अनुरूप इस क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। यह रणनीति डोनाल्ड ट्रंप जैसे पूर्व अमेरिकी नेताओं के भारत-पाकिस्तान मध्यस्थता दावों से अलग नहीं है, लेकिन अब इसे चीन की आधिकारिक विदेश नीति माना जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, वांग यी के बयान का मकसद भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और अर्थव्यवस्था को चुनौती देना है। चीन यह दिखाना चाहता है कि दक्षिण एशिया में उसकी भूमिका निर्णायक है और भारत-पाकिस्तान विवादों में उसकी मध्यस्थता अनिवार्य है।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत इस बयान को नजरअंदाज नहीं कर सकता। अगर भारत ने ठोस और रणनीतिक प्रतिक्रिया नहीं दी, तो चीन इस नैरेटिव को तेजी से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फैलाने की कोशिश करेगा, जिससे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय प्रभाव पर सवाल उठ सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को क्वाड, BRICS और SCO जैसे मंचों का उपयोग करके इस दावे का जवाब देना होगा, ताकि उसकी वैश्विक छवि और क्षेत्रीय भूमिका सुरक्षित रह सके।