Thursday, January 1

चलती ट्रेन में करोड़ों की सोना लूट: गया जीआरपी थानाध्यक्ष गिरफ्तार, चार जवान निलंबित

 

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बिहार पुलिस महकमे को झकझोर देने वाले हाई-प्रोफाइल सोना लूटकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। 21 नवंबर को हावड़ा–जोधपुर एक्सप्रेस में हुई करीब 1.44 करोड़ रुपये की सोने की लूट के मामले में गया जीआरपी थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष (SHO) राजेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उनकी सीधी संलिप्तता सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई।

 

जांच के नाम पर की गई लूट

 

आरोप है कि जांच के बहाने गया जीआरपी के चार जवानों और दो सिविलियन ने कोलकाता से कानपुर सोना ले जा रहे एक कोरियर युवक धनंजय शाश्वत को घेर लिया। उससे करीब एक किलो सोने के तीन बिस्कुट छीन लिए गए। विरोध करने पर युवक के साथ मारपीट की गई और उसे चलती ट्रेन से उतार दिया गया। बाद में आरोपी सोना लेकर फरार हो गए।

 

तकनीकी साक्ष्यों से बेनकाब हुई साजिश

 

रेल एसपी के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने जब वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू की तो मामले की परतें खुलती चली गईं। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल टावर लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण में तत्कालीन SHO राजेश कुमार सिंह की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद उन्हें पटना बुलाकर करीब आठ घंटे तक पूछताछ की गई, जिसके पश्चात उनकी गिरफ्तारी हुई।

 

चार जीआरपी जवान निलंबित

 

इस सनसनीखेज लूटकांड में नामजद चार जीआरपी जवान—सिपाही करण कुमार, अभिषेक चतुर्वेदी, रंजय कुमार और आनंद मोहन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, दो सिविलियन अभियुक्त परवेज आलम और रेल थाना के पूर्व चालक सीताराम की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

 

डीजीपी की निगरानी में SIT जांच

 

इस मामले में गया रेल थाना में कांड संख्या 334/25 दर्ज की गई है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। पुलिस मुख्यालय ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए इसकी निगरानी सीधे डीजीपी स्तर से शुरू कर दी है। जांच की कमान स्वयं रेल एसपी, गया संभाल रहे हैं, ताकि किसी भी स्तर पर निष्पक्षता से समझौता न हो।

 

 

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